आयुर्वेद में है मंकीपॉक्स का इलाज! इन चीजों को खाने से बचे

देश में मंकीपॉक्स को लेकर कोहराम मचा हुआ है। जी दरअसल इसके चार मरीज मिलने के बाद लोगों में इस वायरस को लेकर डर है। अब तक कई लोग मंकीपॉक्स की वैक्सीन और दवाओं के बारे जानकारियां ले रहे हैं। हालाँकि अब तक किसी भी ऍलोपैथी दवा से मंकीपॉक्स के इलाज को लेकर कोई मेडिकल फेक्ट नहीं आया है। लेकिन इन सभी के बीच आयुर्वेदिक डॉक्टरों का कहना है कि आयुर्वेद की कुछ दवाओं के सेवन से इस वायरस के प्रभाव के कम होने की उम्मीद है। अब हम आपको इसके बारे में बताते हैं।

जी दरअसल दिल्ली के आयुर्वेदिक पंचकर्मा अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ आर.पी. पराशर का कहना है कि, 'आयुर्वेद में किसी भी बीमारी का इलाज वात, पित्त और कफ को संतुलित करके होता है। मंकीपॉक्स एक संक्रामक बीमारी है, वात और पित्त की गडबड़ी से ये होती है। ऐसे में उन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। जिनसे इस बीमारी को शरीर में पनपने का मौका मिले।'


जी दरअसल डॉक्टर पराशर का कहना है कि मंकीपॉक्स बीमारी में एंटीवायरल जड़ी -बूटियों के सेवन से संक्रमण को कम किया जा सकता है। जी हाँ और इसके लिए बिडंग, कालमेग, चित्तक आवंला, पपीते के पत्तों का रस, डव स्टिक, भृगंराज, कुटकी, पूनर्लोवा, गिलोय, जय मंगल रस, पंचतीघृत रस, महामृत्युंजय रस का सेवन किया जा सकता है। इन सभी जड़ी-बूटियों को आयुर्वेद डॉक्टर की सलाह के साथ संयुक्त रूप से लिया जा सकता है। इसके अलावा डॉ. पराशार कहते हैं, इस बीमारी में संक्रमण होने पर शरीर पर फफोले बन जाते हैं, जो बाद में सूखने लगते हैं और पपड़ी बनना शुरू हो जाती है। इसको खत्म करने के लिए मरीज नीम की पत्तियों को घीसकर या नीम की छाल को त्वचा पर लगा सकते हैं। 

इसी के साथ डॉक्टर पराशर के मुताबिक, यदि किसी संदिग्ध मरीज में मंकीपॉक्स के लक्षण हैं, तो वह ठंडी तासिर वाली चीजें खाने से बचे। इसमें गोभी, चावल, दही, कढ़ी, मूली शामिल है और खट्टी चीजें भी नहीं खानी चाहिए। इसके अलावा, नमक युक्त चीजें व आचार खाने से संक्रमण बढ़ सकता है।

थकान-बेहोशी है इस बीमारी का गंभीर लक्षण, जानिए इसके बारे में

वजन कम करने से लेकर किडनी स्‍टोन तक में फायदेमंद है कॉर्न सिल्क चाय

वजन कम करने के लिए नहाने के पानी में डाले ये एक चीज

न्यूज ट्रैक वीडियो

- Sponsored Advert -

Most Popular

- Sponsored Advert -