खीरां आई खिचड़ी अर टिल्लो आयो टच्च

! वर्तमान प्रधानमंत्री और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ’मन’ की चोरी कर ली! ’मन’ का अर्थ तो आप समझदार सभी प्राणी अच्छी तरह से समझ ही गये होंगे कि ’मन’ शब्द किसी प्रसंग में यूज किया जा रहा है.....! जी हां अपने मनमोहन सिंह जी ! जो हमेशा मौन राजनीतिक साधक रहकर ’माता’ की आराधना में व्यस्त रहे....परंतु नरेन्द्र मोदी घाघ निकले....! अच्छे दिन आयेंगे चुराकर देशवासियों के दिलों दिमाग में घुस गये....! बापड़े मनमोहन को क्या पता था कि जिस ’अच्छे दिन आने वाले है’ जैसे शब्द को वह अपने ’अंतिम दिनों’ में कलमकारों के बीच कहेंगे, मोदी जी उसे मन मस्तिष्क में बसा कर देश जीत लेंगे.....! 

वैसे मनमोहन सिंह की पीठ पीछे तारीफ करना होगी कि उन्होंने इसे आज तक अपना रागडा किसी के सामने गाया नहीं क्योकि वे मौन है, मौन रहे थे और आगे भी मौन ही रहेंगे। मोदी के ’शब्द चोर’ होने की जानकारी तो उन पर किताब लिखने वाले विदेशी महाशय ने दी है! वैसे अब मनमोहन सिंह के मन मस्तिष्क में जरूर चल रहा होगा कि काश! अच्छे दिन का तंबूरा कांग्रेस उस समय बजा लेती तो खीरां आई खिचड़ी अर टिल्लो आयो टच्च की स्थिति नहीं बनती....! राजस्थान की एक लोक कहावत है खीरां आई खिचड़ी अर टिल्लो आयो टच्च...! 

 इसका अर्थ यह होता है कि कई लोग ऐसे होते है जो ’मेहनत’ नहीं करना चाहते है और किसी के यहां कार्य पूरा होते ही पहुंच जाते है, ताकि कोई यह नहीं कह सके कि उन्होंने काम नहीं किया है....! मोदी ने भी यही किया था, बोला मनमोहन ने, पकड़ लिया नरेन्द्र मोदी ने। कहने का अभिप्राय यह है कि मोदी ने अच्छे दिन आने वाले है जैसे शब्दों को ढूंढने में मेहनत नहीं की लेकिन मीडिया वालों ने जैसे ही छापा, सुनाया दिखाया वैसे ही मोदी ने दिमाग का उपयोग करते हुये शब्द पकड़े और पहुंच गये लोगों के बीच.....! इसका दूसरा अर्थ भी होता है वह यह कि गांवों में ’स्मार्ट’ बच्चों को टिल्लों कहते है अर्थात जब खिचड़ी पक गई तो टिल्ला खाने के लिये तुरंत पहुंच गया....! 

 न 3 में न 13 में फिर भी 29 के पीछे पड़े

आम आदमी पार्टी अब सत्ता के रंग में पूरी तरह रंग गई है, उसे मालूम पड़ गया है कि विपक्षियों के साथ किस तरह से ’तिली लीली-तीली लीली’ करना है! दिल्ली विधानसभा में भाजपाई विधायक न तीन में है और न तेरह में, बावजूद इसके वे 29 नंबर कमरे के लिये पीछे पड़े हुये है.....! ले देकर 3 की संख्या में भाजपाई विपक्षी नेता के लिये 29 नंबरी कमरा मांग रहे है, लेकिन अरविंद केजरीवाल है कि उन्होंने ऐसा 29 नंबर में ऐसा ताला जड़ा कि भाजपाई जमीन पर बैठकर केजरीवाल के नाम पर रोने लग गये....! यह बच्चों जैसी जीद नहीं दिखाई दे रही है......! अंकल-अंकल, मुझे ये ही चाहिये.....! नजीब अंकल के पास भी भाजपा के तीन बच्चे रोये, परंतु अंकल जी अभी पिघले नहीं है क्योकि उन्हें रहना तो ’आप’ की छत्रछाया में ही है, फिर वे 3 के लिये अरविंद से पंगा मोल क्यों लेंगे....! 

 वाह ठकुराइन, क्या बात है

कमर में तलवार लटकाये कभी घूमने वाली इंदौरी ठकुराइन ने देश की राजनीति की धुलाई कर दी...गोया राजनीतिज्ञ न होकर वैरागी हो....! अहिल्या की नगरी में रहने वाली और 3 नंबरी विधायक है तो भाजपा की और वर्तमान में केन्द्र तथा मध्यप्रदेश में भाजपा का ही राज है, लेकिन उनके ठाकुरपन की दाद देना होगी कि उन्होंने उज्जैन में राजनीति को चाटुकारिता और भाटगिरी बता दिया.....! वाह ठकुराइन क्या बात है, आपकी हिम्मत ओरों के लिये प्रेरणास्त्रोत बने, ऐसी हमारी कामना है परंतु अब आपको सावधान हो जाना होगा क्योकि आपकी ’जुबान’ के कारण आपके ही लोगों को मिर्ची लग गई तो....फिर हो सकता है कि आप ’कुशल राजनीतिज्ञों’ की तरह कह दें कि मैने ऐसा तो कहा ही नहीं....! खैर राजनीति की स्थिति आपने बयां की, इसलिये आप धन्य-धन्य है....! 

 भेंट न चढ़ाये अन्नदाता को

भूमि अधिग्रहण बिल हो या फिर चाहे ओला वृष्टि के कारण फसलें बर्बाद हो गई हो, अन्नदाता को राजनीति की भेंट चढ़ाने से राजनेता बाज नहीं आ रहे है। किसानों का दर्द समझे बगैर राजनीति करने वाले लोग एसी कमरे में बैठ किसानों की बात कर रहे है! जिसे दर्द है, उसे ही समझ में आता है, राजनीति करने वालों का क्या.....! आज बोल लिये, कल चुप हो गये, या फिर कल दूसरे मुद्दे पर बुक्का फाड़ लिया.....! अन्नदाता देश की आत्मा है और यदि आत्मा ही झकझोर हो जाये तो क्या देश सुखी रह सकेगा, कदापि नहीं। इसलिये राजनीति न करों, यर्थाथ के धरातल पर आकर मदद करों तो अन्नदाता दुआ देंगे। 

और अंत में कांटा लगा...हाय लगा.... 

 अरविंद केजरीवाल.....पहले योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण.....हम है राही दिल्ली के... अरविंद केजरीवाल... अब ये स्साले उद्बिलाव, लाना आशु, संजय जरा लठ्ठ....भगाकर दम लूंगा...! हाय कांटा लगा कि नहीं....हाय लगा....!
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