'अल्पसंख्यक मंत्रालय' ख़त्म करेगी मोदी सरकार ! 2006 में कांग्रेस ने किया था गठन

नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार, पूर्व की कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए अल्पसंख्यक मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs) को खत्म करने पर विचार कर रही है। डेक्कन हेराल्ड ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि ऐसा हुआ तो सरकार इस मंत्रालय का विलय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) के साथ कर सकती है। हालांकि, मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही योजनाएं, यथावत चलती रहेंगी।

रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय के अधिकारियों ने अभी इस मामले पर कुछ भी बताने से इंकार कर दिया है। किन्तु सूत्र ने कहा है कि, 'भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार का मानना है कि अल्पसंख्यक मामलों के लिए अलग से मंत्रालय की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, ये मंत्रालय केवल UPA की मनमोहन सरकार की तुष्टिकरण की सियासत के कारण वर्ष 2006 में बनाया गया था। अब मोदी सरकार इसे दोबारा से सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय के अंतर्गत लाने पर विचार कर रही है।' बता दें कि मंत्रालय खत्म किए जाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन, कांग्रेस और मुस्लिम संगठनों ने अभी से अपनी नाराजगी प्रकट करना शुरू कर दिया है।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन का कहना है कि भाजपा ऐसा करके समाज को बाँटना चाहती है। कांग्रेस सरकार यह मंत्रालय इसलिए लाई थी, ताकि अल्पसंख्यक मुख्यधारा में आएँ और उनका विकास हो सके। लेकिन, भाजपा सरकार तो हर अवसर को अल्पसंख्यकों के खिलाफ ही इस्तेमाल करती है। वहीं, मुस्लिम संगठन जमात-ए-इस्लामी के सचिव सैयद तनवीर अहमद ने कहा कि ये सब संविधान की आत्मा के विरुद्ध है, इससे मानव विकास रुकेगा। सरकार को तो अधिक से अधिक पैसा देकर मंत्रालय को सशक्त करना चाहिए, ताकि अल्पसंख्यकों का कल्याण हो।

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