श्रम कानून में बदलाव के खिलाफ आंदोलन, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन

नई दिल्ली: एक बार फिर से अर्थव्यवस्थाओं को पटरी पर लाने और नए निवेशकों को अपने राज्य में बुलाने के उद्देश्य से कुछ राज्यों ने श्रम कानूनों में बदलाव किए हैं. ऐसे में मजदूर संघ इन बदलावों के खिलाफ हैं. जी हाँ और इसी क्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय मजदूर संघ ने भी देशव्यापी आंदोलन का फैसला लिया है. वहीं भारतीय मजदूर संघ उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश गुजरात में अन्य राज्यों की ओर से श्रम कानूनों को तीन-चार साल के लिए निरस्त करने के फैसले का विरोध करते हुए एडीसी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया.

ऐसे में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश कार्यालय मंत्री अखिल भारतीय वस्त्र उद्योग कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष राज नारायण यादव, जिला मंत्री चंद्रेश मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष भूषण कुमार यादव ने ज्ञापन सौंपा. जी दरअसल राज नारायण यादव ने कहा कि 'देश में अधिकांश राज्यों में निजी संस्थान श्रमिक कानून की पहले ही अवेहलना की जा रही है.' आप सभी को बता दें कि श्रम कानून राज्य सरकारों की ओर से रद्द किया गया तो मजदूरों के लिए यह किसी जंगल राज्य से काम नहीं होगा.

वहीं उन्होंने कहा कि 'उक्त राज्यों की ओर से ड्यूटी 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे करने और श्रम कानून निरस्त करने के खिलाफ भारतीय मजदूर संघ की ओर से राष्ट्रीय व्यापी आंदोलन किया जाएगा. इसकी शुरुआत 20 मई से कर दी गई है.' उन्होंने कहा, ''मजदूरों के खिलाफ किसी तरह अन्याय सहन नहीं किया जाएगा.' आगे उन्होंने मांग की कि यदि मजदूरों के प्रति किया गया अन्याय और कानून वापस न लिया गया तो संघर्ष तेज किया जाएगा.

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