बागी विधायकों को शिवसेना ने बताया 'नचनिया', सामना में लिखी चौकाने वाली बातें

मुंबई: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार पर सियासी संकट बना हुआ है। इन सभी के बीच शिवसेना ने बागी विधायकों को y+ सिक्योरिटी देने को लेकर केंद्र पर निशाना साधा है। जी दरअसल शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा है कि, 'गुवाहाटी मामले में आखिर भाजपा की पोल खुल गई है।' जी दरअसल सामना में लिखा गया है कि बीजेपी लगातार कह रही थी कि विधायकों की बगावत शिवसेना का अंदरूनी मामला है। लेकिन अब बताया जा रहा है कि वडोदरा में एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस की अंधेरे में गुप्त बैठक हुई है। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह शामिल थे। इसी के साथ सामना में शिवसेना ने लिखा, 'बैठक के बाद केंद्र ने 15 विधायकों को y+ सिक्योरिटी देने का फैसला किया। जैसे मानों ये विधायक मानो लोकतंत्र और आजादी के रखवाले हैं। उनके बालों को भी नुकसान नहीं पहुंचने देंगे। ऐसा केंद्र को लगता है।'

इसी के साथ शिवसेना ने कहा, 'असल में ये लोग 50-50 करोड़ रुपयों में बेचे गए बैल अथवा 'बिग बुल' हैं। यह लोकतंत्र को लगा कलंक ही है। उस कलंक को सुरक्षित रखने के लिए ये क्या उठापटक है? इन विधायकों को मुंबई-महाराष्ट्र में आने में डर लग रहा है या ये कैदी विधायक मुंबई में उतरते ही फिर से 'कूदकर' अपने घर भाग जाएंगे, ऐसी चिंता होने के कारण उन्हें सरकारी 'केंद्रीय' सुरक्षा तंत्र द्वारा बंदी बनाया गया है? यही सवाल है।' इसके अलावा शिवसेना ने सामना में आगे लिखा गया है, 'लेकिन इतना तय है कि महाराष्ट्र के सियासी लोकनाट्य में केंद्र की डफली, तंबूरे वाले कूद पड़े हैं और राज्य के 'नचनिये' विधायक उनकी ताल पर नाच रहे हैं। ये तमाम 'नचनिये' लोग वहां गुवाहाटी के एक पांच सितारा होटल में अपने महाराष्ट्र द्रोह का प्रदर्शन पूरे देश और दुनिया को करा रहे हैं। इस पारंपरिक ड्रामे के सूत्रधार और निर्देशक निश्चित तौर पर कौन है, इसका खुलासा हो ही गया है। केंद्र और महाराष्ट्र की भाजपा ने ही इन नचनियों को उकसाया है। उनकी नौटंकी का मंच उन्होंने ही बनाया व सजाया है और कथा-पटकथा भी भाजपा ने ही लिखी है यह अब छुपा नहीं रह गया है।'

इसी के साथ शिवसेना के मुताबिक, महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल, झारखंड, पंजाब, दिल्ली और गैर भाजपा शासित राज्यों में केंद्र की भाजपा सरकार इस तरह के हस्तक्षेप हमेशा ही करती रही है। जिन राज्यों में भाजपा की सरकार नहीं है, उनके संवैधानिक अधिकारों में अलग-अलग तरह से हस्तक्षेप करना, उनकी संविधान प्रदत्त स्वतंत्रता का गला घोंटना, ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

इसके अलावा सामना में यह भी लिखा गया है, 'महाराष्ट्र जैसा छत्रपति शिवराय की विरासत को आगे बढ़ाने वाला स्वाभिमानी राज्य भी केंद्र की इस मुगलाई से बचा नहीं है। अभी भी महाराष्ट्र से बेईमानी करने वाले 15 गद्दार विधायकों को सीधे 'वाई प्लस' सुरक्षा देने का केंद्र का निर्णय इसी अंधेरगर्दी का हिस्सा है। इन सभी लोगों ने पार्टी से, राज्य से, उन्हें चुनने वाले मतदाताओं से धोखा किया है। फिर भी राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार ने उन्हें दी गई सुरक्षा वापस नहीं ली है। ये गद्दार बेईमान हो गए होंगे, फिर भी राज्य सरकार ने अपना धर्म नहीं छोड़ा है।'

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