मैगी की रिपोर्ट को SC में किया प्रस्तुत

नई दिल्ली : मैसूर की प्रयोगशाला ने मैगी की जांच रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में बंद कर सर्वोच्च न्यायालय में जमा करवा दिया है। केंद्र सरकार के अभिभाषक ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि प्रथम रिपोर्ट के अनुसार मैगी में लेड सही मात्रा में था। मैगी का निर्माण करने वाली कंपनी नेस्ले ने सर्वोच्च न्यायालय को कहा कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्डस अथाॅरिटी आॅफ इंडिया के नोटिफिकेशन के अनुसार मैगी में एमएसजी की मात्रा का पता नहीं चल सकता है।

दरअसल मोनोसोडियम ग्लुटामेट का पता मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस के दौरान यह पता लगाया जा सकता है। मोनोसोडियम ग्लुटामेट का पता मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस द्वारा ही लगाया जा सकता है।

केंद्र सरकार द्वारा यह कहा गया कि मैसूर की लैब द्वारा 16 रिपोर्ट्स सामने रख चुकी हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने नेस्ले और केंद्र सरकार का पक्ष भी पूछा मामले की सुनवाई 19 जुलाई को किए जाने की बात कही है।

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