मध्याह्न भोजन लेने से मदरसों ने किया इन्कार

उज्जैन : मदरसा संचालित करने वाली स्वयं सेवी संस्था ने मदरसों के बच्चों को दिये जाने वाला मध्यान भोजन लेने से मना कर दिया। इस मामले में यह आरोप लगाया गया है कि जिसे भोजन बनाने का टेंडर पास हुआ वह भोजन बनाने के बाद भगवान को भोग लगाता है। वह संस्थाओं को ही भोजन बांटता है। इसके पहले इस्काँन के द्वारा भोजन वितरण किया जाता था। मगर इस भोजन को लेने से भी मना कर दिया गया था।

मध्याह्न भोजन लेने वाली संस्थाओं का कहना था कि इस्काॅन के मध्याह्न भोजन से जुड़े स्वयं सेवक इसमें गोमूत्र का छिड़काव करते थे, जबकि इस्काँन द्वारा इसका खंडन किया गया था। मगर इसके बाद भी मध्याह्न भोजन नहीं लिया गया। इस मामले में यह बात सामने आई कि विरोधियों ने इस मामले में ज्ञापन दिया। दरअसल जिला पंचायत कार्यपालन अधिकारी को यह ज्ञापन सौंपा गया। इस मामले में काफी हंगामा हो गया और यह कहा गया कि मदरसों में मध्याह्न भोजन क्यों स्वीकार नहीं किया जा रहा है, केवल उज्जैन में ही इसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है। अन्य स्थानों पर मदरसे संचालित करने वाले को कोई आपत्ति नही है।

फिर भगवान को भोग लगाने का अर्थ क्या हुआ? आखिर इस माँग में एक बू आ रही है? क्या है इस पर जाँच होना चाहिये? जिम्मेदारों ने कहा कि क्योंकि इनके द्वारा सीधे भगवान के भोग पर प्रश्नचिन्ह लगाया गया है, अब इन्हें कौन समझाये शहर में 90 दुकानें हिन्दू समाज कि है वे अपने संस्थाओं में भोग के बाद ही ब्रिक्री आदि का श्रीगणेश करते है।

इन संस्थाओं को शासन द्वारा अनुदानों सहित कई सुविधाऐं दी जाती है इस पर गहन चिंतन मनन प्रशासन को करना चाहिये। मदरसे में कितने बच्चे है? क्या वो मदरसे के अलावा अन्य स्कुलो में जाते है? वहां इन बच्चों को शासन द्वारा निर्धारित कोर्स पडाया जाता है कि नही? वर्तमान में बच्चों का बौद्धिक स्तर क्या है? इन सब कि माँनिटरिंग कि आवश्यकता है क्योंकि जो संचालक दौ समुदाय के दुरियाँ बडाने का काम कर रहे है वे मदरसों में किस प्रकार का ज्ञान देते होगें इसकी गंभीरता से समीक्षा आवश्यक है? जन प्रतिनिधियों को इस विषय को विधानसभा में भी ले जाना चाहिये।

महाकाल के दर्शन करने गए दर्शनार्थियो की जीप शिप्रा में डूबी

- Sponsored Advert -

Most Popular

- Sponsored Advert -