सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को दी निचली अदालत में चुनौती

Feb 08 2016 03:01 PM
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को दी निचली अदालत में चुनौती

नई दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक व्यक्ति के संपत्ति संबंधी मामले में निर्णय दिया था। जिसे जौनपुर जिले के सिविल न्यायालय में चुनौती दी गई। सिविल जज न्यायिक अनुशासन और नियमों का उल्लंघन करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के विरूद्ध याचिका की सुनवाई करने को लेकर वे तैयार हो गए। सिविल जज ने सर्वोच्च न्यायालय में संपत्ति का कानूनी संबंधी मालिकाना अधिकार जीतने वाले विपक्षियों के विरूद्ध नोटिस जारी कर दिया गया है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश जे एस केहर और न्यायाधीश सी नागाप्पन की पीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को निचली अदालत में चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता मथुरा के आचरण पर याचिकाकर्ता को अवमानना नोटिस जारी किया है और अगली तारीख पर पेश होने को कहा है। बता दे कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय ऐसा निर्णय होता है जो राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी मान्य होता है।

मिली जानकारी के अनुसार जौनपुर जिले के गांव में निवास करने वाले मथुरा और शोभनाथ के मध्य एक एकड़ भूमि के विवाद को लेकर 1981 में मुकदमेबाजी प्रारंभ की गई थी। अतिरिक्त न्यायाधीश ने वर्ष 2009 में शोभानाथ के पक्ष में निर्णय दिया इस निर्णय को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वर्ष 2013 में जारी रखा। 

सर्वोच्च न्यायालय ने इस आदेश को मान लिया। साथ ही मथुरा की अपील को खारिज कर दिया गया। मथुरा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पसन्द नहीं किया और पांच माह बाद ही निचली अदालत, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर सवाल उठाते हुए जौनपुर जिला सिविल जज की अदालत में मुकदमा दायर कर दिया। 

इस मामले में शोभनाथ के अभिभाषक सुग्रीव दुबे और सर्वेश सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि स्पष्ट है कि यह शीर्षस्थ न्यायालय की अवमानना है। इस मामले में न्यायालय को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। इस मामले में पीठ द्वारा कहा गया कि यह एक तरह का गंभीर मामला है। जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना हुई है। हालांकि ऐसा पहली ही बार देखने में आया है जब सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से संतुष्ट न होने पर व्यक्ति फिर से निचली अदालत में याचिका दायर करता है।