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शुभ कार्यों का निमंत्रण पत्र जानें कब करें तैयार

शुभ कार्यों का निमंत्रण पत्र जानें कब करें तैयार

संसार में व्याप्त हर एक परम्परा को विधि पूर्वक या किसी विशेष नियमों के साथ निभाने से उसकी महत्वता और भी बढ़ जाती है.  वास्तु के अनुसार बताया जाता है. की जब भी आप कोई मांगलिक कार्य हो या फिर खुशी का मौका, इन अवसरों पर अपने मिलने वालों, रिश्तेदारों व मित्रों को न्योता देने के लिए पत्र लिखते है तो उसके लिखने के पूर्व यदि कछु विशेष बातों का ध्यान देते है. तो आपके कार्यों में अच्छी सफलता मिलती है. और कार्यों में किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं होती है.

अपने सम्बन्धियों , दोस्तों और अन्य लोगों को निमंत्रण पत्र देने का भी एक शुभ समय होता है. जिससे सभी कार्य मंगलपूर्वक संपन्न होते हैं.इस पत्र को लिखने और वितरण करने की शुरुआत बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार इन दिनों से करें शास्त्रों द्वारा बताया जाता है कि  बुधवार  को द्वितीया, सप्तमी और द्वादशी हो, गुरुवार को पंचमी, दशमी या पूर्णिमा हो, शुक्रवार को तृतीया, अष्टमी तथा त्रयोदशी हो, तो अति उत्तम होता है.

नक्षत्र : यदि चंद्रमा स्वा‍ति, पुनर्वसु, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, अश्विनी और हस्त में हो और पंचम भाव शुभ हो.

पुत्र  विवाह : जिस दिन निमंत्रण देना है, उस समय की लग्न कुंडली में सप्तम भाव, द्वितीय स्थान तथा इनके स्वामी और स्त्री कारक शुक्र, शुभ प्रभाव में हो, पाप ग्रहों (शनि, राहु, केतु, सूर्य, मंगल) से यु‍ति-दृष्टि न बने। तब निमंत्रण लिखें.

पुत्री-विवाह : सप्तम भाव, द्वितीय इनके स्वामी और गुरु (स्त्री के लिए गुरु पति होता है) शुभ ग्रहों से युत या दृष्ट हो उच्च, स्वग्रही, मित्र राशि में, शुभ नवांश में हो) तब लिखें.

भवन : चतुर्थ भाव, इसका स्वामी ग्रह और मंगल शुभ प्रभाव में हो तथा बली हो, तब गृह प्रवेश का निमंत्रण लिखना चाहिए