देशभर में छाया शोक, नहीं रहे अलीगढ़ के अंतिम स्वतंत्रता सेनानी

अलीगढ़: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आफताब अहमद खां का बुधवार को अलीगढ़ के अतरौली में इंतकाल हो गया. पैर में तकलीफ के चलते वह कई दिन से जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे. बुधवार सुबह 7:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है. पूरे राजकीय सम्मान के साथ अतरौली के पुराना रामघाट रोड स्थित कब्रिस्तान में उनके शव को सुपुर्द ए खाक किया गया. पूर्व सांसद चौ. विजेंद्र सिंह और पूर्व विधायक वीरेश यादव ने पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की. नायब तहसीलदार दिनेश शर्मा, एसएसआई रितेश कुमार, एसआई रवेंद्र सिंह के साथ पुलिस टीम ने उनके शव पर तिरंगा ओढ़ाया और सलामी दी गई.

कौन थे आफताब अहमद खां?: बता दें कि अतरौली कस्बे के मोहल्ला चौधरियान निवासी आफताब अहमद खां पुत्र शेर मोहम्मद खान का जन्म 10 जनवरी, 1925 को हुआ था. उन्होंने महात्मा गांधी के साथ देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. 10 साल के थे तभी अंग्रेज सैनिकों ने उनका घर ढहा दिया था. खेतों में खड़ी फसल बर्बाद कर दी थी. इसके बाद वह आजादी के लिए गांधी जी के आंदोलन से जुड़ गए. उन्होंने आगरा में गधापाड़ा का रेलवे पुल बम से उड़ाया था. सेठ अचल सिंह व ज्वाला प्रसाद जुज्ञासी के साथ वह आगरा जेल में बंदी रक्षक के पद पर भी रहे. देशवासियों को जेल में यातनाओं का उन्होंने खिलाफ किया तो तबादला अलीगढ़ कर दिया गया. 

जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि जेल में ही एक बार अंग्रेज सिपाहियों ने उनकी हाथ की हड्डी व पसली तक तोड़ दीं, फिर भी उनका आजादी का जुनून नहीं थमा. जेल में बंदियों के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेजी सिपाहियों को पीटा और भाग गए. इसके बाद उन्होंने दीनापुर में पूर्व विधायक स्व. बाबू सिंह यादव के यहां फरारी काट चुके थे. 

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