जानिए ईद से जुड़े सवालों के जवाब

रमजान के अंतिम रोजे के बाद चांद के दीदार होने पर ईद मनाई जाती है. कहते हैं रमजान के महीने में ही पाक कुरान इस धरती पर आई थी. इसके ईद को लेकर कई लोगों के मन में कई सवाल उठते है कि ईद क्यों मनाई जाती है, रमजान के महीने में ही रोजे क्यों रखे जाते हैं, क्यों लोग चांद देखकर ही ईद की घोषणा करते हैं? आइये आपको कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब बताते हैं .

क्यों मनाई जाती है  : ईद रमजान में पूरे महीने रोजे रखने के बाद इसकी समाप्ति के रूप में ईद मनाई जाती है. ईद पर एक परंपरा निभाई जाती है जिसे फितरा कहा जाता है,जिसमें ईद मनाने वाले हर मुस्लिम को अपने पास से गरीबों को कुछ अनाज देना जरूरी होता है, ताकि वह भी ईद मना सके .

कब मनाई गई पहली ईद :  इस दुनिया में पहली ईद कब मनाई गई. इसके बारे में इस्लाम में माना जाता है कि पहली ईद हजरत मुहम्मद पैगंबर ने सन 624 ईस्वी में जंग-ए-बदर के बाद मनाई थी. तब से ही ईद मनाई जाती है.

चांद देखकर ही क्यों मनाते हैं  : ईद रमजान के माह में आखिरी रोजे के बाद चांद देखकर ही ईद मनाई जाती है. ईद का चांद से बड़ा गहरा संबंध है. ईद उल फितर हिजरी कैलेंडर के दसवें महीने के पहले दिन मनाई जाती है .इस कैलेंडर में नया महीना चांद देखकर ही शुरू होता है. ईद भी रमजान के बाद नए महीने की शुरूआत के रूप में मनाई जाती है जिसे शव्वाल कहा जाता है.

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