प्रयागराज: शुरू हुआ कढ़ी पकोड़े का भोज, तस्वीरों में सिमटने लगा कुम्भ

Feb 14 2019 12:05 PM
प्रयागराज: शुरू हुआ कढ़ी पकोड़े का भोज, तस्वीरों में सिमटने लगा कुम्भ

प्रयागराज: प्रयागराज कुंभ का वैभव पूरे विश्व ने देखा,  कुंभ की परंपराओं को सभी लोगों ने महसूस किया। करीब डेढ़ महीने के कुंभ में विश्व भर के करोड़ों लोगों ने प्रयागराज में कुंभ में आस्था की डुबकी लगाई, कुंभ का दर्शन किया और कुंभ की यादों में अपने ज़हन में समेट कर ले गए। किन्तु अब वही प्रयागराज कुंभ भी यादों की तस्वीरों में सिमटने लगा है। संत लौट रहे हैं, जनता जा रही है, अदृश्य रूप से कुंभ में विराजमान जनार्दन भी वापसी पर हैं। जा रहा है सनातन संस्कृति की सजीव परंपरा का यह दौर और परंपरा का ये क्रम कढ़ी पकोड़े की थाली में सिमट कर अपने समापन की ओर इशारा कर रहा है।

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दरअसल, कुंभ कहीं भी आयोजित हो, इसका समापन कढी पकौड़े के भोज के साथ होता है। कुंभ के क्रम में एक साथ जब संत कढी पकौड़ा का भोज करने लगें, तो समझ लीजिए की कुंभ जा रहा है। कुंभ के समापन में कढ़ी पकौड़े के भोज के साथ साथ संतो का एक नारा भी लगता है और वो नारा होता है, ''कढ़ी पकौड़ा बेसन का, रास्ता पकड़ो स्टेशन का''। और इसके पीछे कारण ये है कि प्राचीन समय में केवल ट्रेन की व्यवस्था कुंभ में आवाजाही के लिए होती थी, इसलिए कढ़ी पकौड़े का संबंध रेलवे स्टेशन से जुड़ गया।

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अगर कुंभ की बात करें तो 2 खाद्य पदार्थों का इससे अटूट संबंध है, पहला खाद्य पदार्थ है, खिचड़ी और दूसरा है कढ़ी पकौड़ा। कुंभ का संबंध कढ़ी पकौड़े से क्या है ये तो आपने समझ लिया, अब चलिए आपको खिचड़ी का संबंध भी कुंभ से समझाते हैं। देश में 4 स्थानों पर लगने वाले कुंभ की बात करें तो सभी स्थानों पर भव्य पेशवाई और शोभा यात्रा के साथ 13 अखाड़े कुंभ क्षेत्र में पहुँचते हैं और पेशवाई की वही परंपरा खिचड़ी के साथ जुड़ी हुई है। दरअसल परंपरा और मान्यता यह है कि पेशवाई के साथ अपने शिविर में प्रवेश करने के बाद अखाड़े के संत गण खिचड़ी का भोग बनवाते हैं, जिसे वे बांटते भी हैं और खाते भी हैं। पेशवाई के साथ ही साथ खिचड़ी का भोज भी कुंभ के शुभारंभ की घोषणा  करता है। अब प्रयागराज कुंभ में कीर्तन के साथ कढ़ी पकौड़े का भोज आरम्भ हो चुका है और कुंभ का समापन हो रहा है।

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