जमीयत उलेमा ए हिंद का बड़ा सम्मेलन, मंदिर-मस्जिद के मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

नई दिल्ली: देश में मुस्लिम समुदाय के सामने मौजूद तथाकथित राजनीतिक-सामाजिक और धार्मिक चुनौतियों पर मुस्लिमों की सबसे बड़ी संस्था जमीयत उलेमा-ए हिंद देवबंद में बड़ा सम्मेलन कर रही है। इस सम्मेलन में जमीयत उलेमा-ए-हिन्द से संबंधित 5000 मौलाना और मुस्लिम बुद्धिजीवी हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम का नेतृत्व जाने-माने इस्लामी विद्वान मौलाना महमूद मदनी कर रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि जमीयत उलेमा-ए हिंद मुस्लिमों का 100 वर्ष पुराना संगठन है। जमीयत मुसलमानों का सबसे बड़ा संगठन होने का दावा करता है। इसके एजेंडे में मुस्लिमों के राजनीतिक-सामाजिक और धार्मिक मसले रहते हैं। जमीयत उलेमा-ए हिंद, इस्लाम की देवबंदी विचारधारा का पालन करता है। देवबंद की स्थापना वर्ष 1919 में तत्कालीन इस्लामिक विद्धानों ने की थी। इनमें अब्दुल बारी फिरंगी महली, किफायुतल्लाह देहलवी, मुहम्मद इब्राहिम मीर सियालकोटी और सनाउल्लाह अमृतसरी जैसे बड़े नाम शामिल थे। 
 
ब्रिटिश शासन के दौरान जमीयत कांग्रेस के साथ कदम से कदम मिलाकर तथाकथित खिलाफत आंदोलन में शामिल हुआ था। बताया जाता है कि इसने देश के विभाजन का भी विरोध किया था और भारत की संयुक्त सांस्कृतिक विरासत की पैरवी की। हालांकि देश के बंटवारे के दौरान इस स्टैंड के कारण जमीयत में विभाजन हो गया और जमीयत उलेमा ए इस्लाम नाम का एक नया संगठन बना जो पाकिस्तान बनने का समर्थन कर रहा था। 

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