संघर्ष के साथ अंतरिक्ष में भारत की आत्मनिर्भर उड़ान के सफल 50 वर्ष

By Lav Gadkari
Sep 29 2015 10:15 PM
संघर्ष के साथ अंतरिक्ष में भारत की आत्मनिर्भर उड़ान के सफल 50 वर्ष

अग्नि और धुंए के गुबार को पीछे छोड़ता हुआ जैसे ही एस्ट्रोसैट उपग्रह आसमान की उंचाईयों को छूता हुआ अंतरिक्ष की गहराई में खो गया। इसके बाद पृथ्वी की कक्षा में स्थापित होने के बाद इस उपग्रह ने अपने संकेत देना प्रारंभ कर दिए। यही नहीं पीएसएलवी सी श्रेणी उपग्रह के साथ भारत ने विदेशी उपग्रहों को भी प्रक्षेपित किया। यह प्रक्षेपण भारत के लिए अंतरिक्ष के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के बढ़ते कदमों को दृढ़ता से रखे जाने के संदेश दे रहा था। जी हां, डाॅ. विक्रमसाराभाई स्पेस रिसर्च सेंटर की संकल्पना के साथ भारत ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों की गगनभेदी उड़ान भरी तो वह आज एक परिपक्वता में बदलती नज़र आ रही है।

इस दौरान कुछ असफलताऐं भी मिलीं लेकिन भारत इनसे सीखकर आगे बढ़ा और आज वह अपने आकाश से विदेशी उपग्रहों को प्रक्षेपित कर रहा है। ये उपग्रह भारत के सीमा क्षेत्रों की निगरानी, मौसम, कृषि, और खगोलीय जानकारी प्रदान करने में भारत को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। इससे भारत कई मामलों में स्वतः ही आकाश गंगा की जानकारी प्राप्त कर सकता है। इसरो अंतरिक्ष कार्यक्रम के 50 वर्ष पूर्ण होने पर इसे सफलता के साथ उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है। हालांकि पहले भारत का विरोध अमेरिका ने बूस्टर उपग्रह को लेकर किया।

मगर अब यही अमेरिका भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग कर रहा है साथ ही भारत ने भी अमेरिका के उपग्रहों को प्रक्षेपित किया है। हालांकि सदियों पहले ही हमारे ऋषियों और वेदज्ञों ने बिग बैंग, और ग्रहों की गति के साथ ही ब्रह्मांड के अन्य रहस्यों को जान लिया था लेकिन आधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में भी हमारे वैज्ञानिक अब अंतरिक्ष में आत्मनिर्भरता की सफल उड़ान भर चुके हैं। 

'लव गडकरी'