किसानों की मुसीबतें बढ़ा रही बैंक

May 06 2015 12:43 PM
किसानों की मुसीबतें बढ़ा रही बैंक

मुंबई : पहले से किसान की मुसीबते कम नहीं हो रही है और बैंक फिर किसानो की मुसीबते बढ़ा रही है, बैंक लोन से जूझ रहे बैंक वसूली के लिए अनूठे नुक्से आजमाए तरीके अपना रहे हैं। आंध्रा बैंक ठीक उसी तरह गांधीगीरी कर रहा है, जैसे फिल्म 'लगे रहो मुन्नाभाई' में ऐक्टर संजय दत्त ने किया था। कुछ दिन पहले बैंक की एंप्लॉय यूनियन के लोग एक बकाएदार रिटेल कंपनी के चेयरमैन के ऑफिस के बाहर धरने पर हाथ में बकाया चुकाओ की तख्तियां लिए बैठे थे। कुछ सरकारी बैंक ये तरीका छोटे कर्जदारों पर आजमा रहे हैं और इसमें उनको कामयाबी भी मिल रही है।

आंध्रा बैंक के फॉर्मर चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सीवीआर राजेंद्रन कहते हैं, ''कुछ लोन तो बहुत पुराने हैं और उनकी वसूली की कभी कोशिश भी नहीं हुई थी। उनकी वसूली यूनियन और लोकल पुलिस की वजह से मुमकिन हो पाई है।'' राजेंद्रन 30 अप्रैल को रिटायर हो गए हैं। उनकी चेयरमैनशिप में बैंक ने एक साल में 1700 करोड़ रुपये का लोन रिकवर किया। यह बैंक के कुल लोन का 20 फीसदी है और इसकी वसूली का कुछ श्रेय गांधीगीरी को दिया जा सकता है। जनवरी से अब तक बैंक को लगभग 900 रिकवरी प्रोग्राम में मदद मिली है।

यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया ने भी खासतौर पर पश्चिम बंगाल में बकाया रिकवरी के लिए धरना-प्रदर्शन की ही स्ट्रैटेजी अपनाई थी। दिसंबर क्वॉर्टर में बैंक ने रिकॉर्ड 194 करोड़ रुपए की कैश रिकवरी की थी और अपने लगभग 318 करोड़ रुपए के लोन अकाऊंट को अपग्रेड कराया था।मतलब इंस्टॉलमेंट की पेमेंट दोबारा शुरू कराके उसको नॉन परफॉर्मिंग कैटगरी से अपग्रेड करा दिया गया था। ये 512 करोड़ रुपए बैंक के 5,240 करोड़ रुपए के 10 फीसदी नॉन परफॉर्मिंग एसेट के बराबर हैं।

यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ पी श्रीनिवास ने कहा, ''रिकवरी के लिए धरना इतना असरदार रहा है कि कुछ डिफॉल्टर्स तो खुद सामने आकर कह रहे हैं कि हमारे घर के सामने धरना मत दिलवाओ। हम हफ्ते भर में पेमेंट शुरू करा देंगे।'' बड़े लोन बांटने पर पाबंदी लगने के बाद से पूरे साल बैंक बकाया वसूली में लगा रहा है। यह उन बैंकों में शामिल रहा है जिन्होंने बकाया वसूली के लिए धरना और मोर्चा में अपने स्टाफ को शामिल किया है। आंध्र बैंक ने 3.5 लाख बैंक खाताधारकों के साथ गांधीगीरी की है। बैंक को उनमें से 1.5 लाख कर्जदारों को बकाया चुकाने को राजी करने में कामयाबी मिली है। इस अभियान में 10 लाख से कम के लोन को कवर किया गया है और रिकवरी रकम लगभग 12 करोड़ रुपए रही है।