आतंकी अजहर मसूद पर चीन रुख साफ करे, भारत ने तैयार किये कई एक्शन प्लान

नई दिल्ली : आतंकी मसूद अजहर और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रतिबन्ध पर चीन को इस सप्ताह के अंत तक अपना रुख साफ करना ही होगा. भारत भी चीन के फैसले के इंतजार में है. चीन के फैसले के अनुसार ही भारत अपना अगला कदम उठाएगा. नकारात्मक जवाब मिलने की दशा में भारत ने भी कई एक्शन प्लान तैयार कर रखे हैं.

गौरतलब है कि चीन ने इस वर्ष 31 मार्च को आतंकी मसूद अजहर को आतंकी घोषित किए जाने के रास्ते में अड़ंगा लगा दिया था इस कारण भारत की जैश-ए-मोहम्मद पर प्रतिबन्ध लगाने की योजना असफल हो गई थी. स्मरण रहे कि संयुक्त राष्ट्र संघ के 15 देशों के समूह में अकेला चीन ही ऐसा था जिसने मसूद अजहर को आतंकी घोषित किए जाने के फैसले को 'होल्ड' पर रखा था .बता दें कि मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख और पठानकोट आतंकी हमले का मास्टरमाइंड है.

अगर चीन अपने 'होल्ड' को आगे नहीं बढ़ाता है तो मसूद अजहर खुद-ब-खुद आतंकी घोषित हो जाएगा. साथ ही जैश-ए-मोहम्मद भी प्रतिबंधित आंतकी संगठनों की सूची में शामिल हो जाएगा.हालाँकि इस साल 5 नवंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल और चीन के रक्षा सलाहकर यांग जिएची के बीच हुई बैठक में चीन ने यह स्पष्ट कर दिया था कि व मसूद अजहर पर अपने फैसले को बदलने वाला नहीं है.जबकि दोनों देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते आतंकवाद को लेकर गंभीर हैं.

बता दें कि यदि चीन ने अजहर को लेकर अपना अड़ियल रुख नही छोड़ा ,तो भारत ने चीन के फैसले के बाद लिए जाने वाले कई एक्शन प्लान पहले से ही तय कर रखे हैं. भारत कई दूसरे आतंकियों जैसे मसूद अजहर के भाई, अब्दुल रौफ असगर, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के कुछ और आतंकियों पर प्रतिबन्ध लगाने का प्रस्ताव भी रख सकता है.अगर चीन मसूद अजहर और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों पर अपना रुख स्पष्ट नहीं करता है तो यह उसकी छवि के लिए भी खतरनाक होगा. हाल में चीन ने कहा था कि आतंकवाद से लड़ने के लिए दोहरा रवैया नहीं अपनाया जाना चाहिए और न ही इसके नाम पर राजनीतिक फायदा उठाया जाना चाहिए.

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