भारत सरकार ने X को दिया कुछ अकाउंट और पोस्ट रोकने का आदेश ..! जानिए क्या बोली सोशल मीडिया कंपनी
भारत सरकार ने X को दिया कुछ अकाउंट और पोस्ट रोकने का आदेश ..! जानिए क्या बोली सोशल मीडिया कंपनी
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वाशिंगटन: दुनिया के सबसे रईस व्यक्ति एलन मस्क के एक्स (पूर्व में ट्विटर) ने दावा किया है कि भारत सरकार ने "आदेश" जारी कर सोशल मीडिया दिग्गज को कुछ चुनिंदा एकाउंट्स और पोस्ट पर कार्रवाई करने के लिए कहा है। हालाँकि, सरकार ने अभी तक कंपनी के आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। 

आज गुरुवार (22 फ़रवरी) तड़के एक्स के ग्लोबल गवर्नमेंट अफेयर्स पर लिखे गए एक पोस्ट में कंपनी ने इस कदम से असहमति जताते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आधार पर पोस्ट को रोका नहीं जाना चाहिए। हालाँकि, एक्स ने कहा कि वह भारत सरकार के आदेश का पालन करेगा। पोस्ट में लिखा है कि, "भारत सरकार ने कार्यकारी आदेश जारी किए हैं, जिसमें एक्स को विशिष्ट खातों और पोस्टों पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है, जिसमें महत्वपूर्ण जुर्माना और कारावास सहित संभावित दंड हो सकते हैं।"

इसमें आगे कहा गया है कि, "आदेशों के अनुपालन में, हम इन खातों और पोस्टों को केवल भारत में ही रोक देंगे; हालांकि, हम इन कार्रवाइयों से असहमत हैं और मानते हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इन पोस्टों तक विस्तारित होनी चाहिए।" एक्स ने कहा कि सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका अभी भी लंबित है। इसमें कहा गया है कि, "हमारी स्थिति के अनुरूप, भारत सरकार के अवरुद्ध आदेशों को चुनौती देने वाली एक रिट अपील लंबित है। हमने प्रभावित उपयोगकर्ताओं को हमारी नीतियों के अनुसार इन कार्रवाइयों की सूचना भी प्रदान की है।"

बता दें कि, पिछले साल जून में, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कुछ सोशल मीडिया खातों और ट्वीट्स को ब्लॉक करने के सरकार के आदेशों के खिलाफ एक्स की याचिका खारिज कर दी थी। भारत सरकार के आदेशों का पालन न करने पर हाई कोर्ट ने कंपनी पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि उच्च न्यायालय ने इस मामले पर सरकार के रुख को बरकरार रखा है और कहा है कि "देश के कानून का पालन किया जाना चाहिए।"

एक्स के बयान में कहा गया है, "कानूनी प्रतिबंधों के कारण, हम कार्यकारी आदेशों को प्रकाशित करने में असमर्थ हैं, लेकिन हमारा मानना ​​है कि उन्हें सार्वजनिक करना पारदर्शिता के लिए आवश्यक है। प्रकटीकरण की कमी से जवाबदेही की कमी और मनमाने ढंग से निर्णय लेने की संभावना हो सकती है।"

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