रूप चौदस के दिन निखारे अपनी त्वचा

रूप चौदस का यह दिन यह अपने सौन्दर्य को निखारने का दिन है. भगवान की भक्ति व पूजा के साथ खुद के शरीर की देखभाल भी बहुत जरुरी होती  है. रूप चौदस का यह दिन स्वास्थ्य के साथ सुंदरता और रूप की आवश्यकता का सन्देश देता है.

रूप चौदस के दिन सुबह जल्दी उठकर शरीर पर तेल की मालिश की जाती है. कुछ लोग तेल में हल्दी , गेहूं का आटा , बेसन आदि मिलाकर उबटन बना कर इसे शरीर पर लगाकर नहाते है. नहाने के पानी में चिचड़ी के पत्ते डाले जाते है. इस स्नान को अभ्यंग स्नान कहते है है. कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण नरकासुर का वध करने के बाद तेल से नहाये थे, तब से यह प्रथा शुरू हुई. यह स्नान करने से नरक से मुक्ति मिलती है . इसलिए इसे नरक चतुर्दशी भी कहते है.

कुछ जगह भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है. इस दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण करके देवताओं को राजा बलि के आतंक से मुक्ति दिलाई थी. भगवान ने राजा बलि से वामन अवतार के रूप में तीन पैर जितनी जमीन दान के रूप में मांगकर उसका अंत किया था . राजा बलि के बहुत ज्ञानी होने के कारण भगवान विष्णु ने उसे साल में एक दिन याद किये जाने का वरदान दिया था. अतः नरक चतुर्दशी ज्ञान की रौशनी से जगमगाने का दिन माना जाता है.

कैसी रहेगी आपके लिये धनतेरस और...

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