क्या आप जानते हैं ईद-उल-फितर का इतिहास

ईद का त्यौहार दुनियाभर में लोग बड़े उत्साह से मनाते हैं. इसी के साथ यह त्यौहार रमजान के पवित्र महीने के बाद आता है और रमजान के पवित्र महीने में लोग रोजा रखते है. इसी के साथ ईद मुस्लिमों का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है. इसी के साथ इस दिन सारे मुसलमान मस्जिद में जाकर नमाज अदा करते हैं और लोग एक दूसरे के गले मिलकर ईद की शुभकामनाएं देते है.

आप सभी को बता दें कि ईद-उल-फितर का पर्व रमजान का चांद डूबने और ईद का चांद नजर आने पर मनाया जाता है और ऐसा माना जाता है कि इसी महीने में ही कुरान-ए-पाक का अवतरण हुआ था. जी दरअसल ईद उल-फितर के बारे में कहा जाता है कि पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बद्र के युद्ध में जब जीत हासिल की थी, इसी जीत की खुशी को लोगों ने ईद का नाम दिया था. वहीँ पहली बार ईद का त्यौहार 624 ई. में मनाया गया और उसके बाद से यह रवायत बन गई.

इसी के साथ कुरआन के अनुसार पैगंबरे इस्लाम ने कहा है कि जब अहले ईमान रमजान के पवित्र महीने के एहतेरामों से फारिग हो जाते हैं और रोजों-नमाजों तथा उसके तमाम कामों को पूरा कर लेते हैं तो अल्लाह एक दिन अपने उक्त इबादत करने वाले बंदों को बख्शीश व इनाम से नवाजता है. इस कारण इस दिन को 'ईद' कहते हैं और इसी बख्शीश व इनाम के दिन को ईद-उल-फितर का नाम देते हैं.

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