भारत में महंगाई ला सकती है बुलियन की यह चाल

देश में हुई जोरदार बारिश के बाद लोग खुश थे कि चलो, इस बार तो बुआई अच्छी होगी और फसल भी अच्छी पकेगी। फिर देशी बाजार चल निकलेंगे। त्यौहारी कारोबार में कारोबारियों की बांछे खिलेंगी। हां कहीं - कहीं अतिवृष्टि हुई और लोग परेशान हो उठे मगर फिर भी लोगों को बाजार से अच्छी उम्मीद थी। मगर अब बाजार में वर्ष 2008 जैसे हालात नज़र आ रहे हैं। अंतर यह है कि इस बार चीनी बाजार निचले पायदान पर है।

ऐसे में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर हुआ है। भारत में भी विदेशी निवेशकों ने एकाएक अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। जिससे भारत का विदेशी निवेश कम हो गया है। अब ऐसे में रूपए की कीमत डाॅलर की तुलना में बेहद कम हो गई है। रूपए का मूल्य 66.39 रूपए प्रति डाॅलर पर पहुंच गया है। माना जा रहा है कि रूपए के अवमूल्यन के कारण देश में फिर से महंगाई हावी हो जाएगी। हां, पैट्रोलियम की कीमत जरूर कम है लेकिन यह आर्थिक परिदृश्य के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा है। सेंसेक्स की गिरावट में इसे भी जिम्मेदार माना जा रहा है। अब ऐसे में आम भारतीय की जेब और भी हल्की होने का अंदेशा है।

विदेशी निवेश कम होने से भारत के पास मौजूद विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आ जाएगी। जिसके चलते भारत को सोने का आयात करने के लिए अतिरिक्त पूॅंजी की आवश्यकता होगी। जिसके कारण भारतीय उपभोक्ताओं पर महंगाई की मार पड़ सकती है। दूसरी ओर भारत में दालों समेत अन्य सामान को आयात किया जाता है। विदेशों से आयातीत यह सामान भी महंगा होने की संभावना है।

हालांकि बाजार को भारतीयों द्वारा अपनाई गई बचत की आदत जरूर कुछ सुकून दे सकती है। मगर महंगाई की दर पर फिलहाल लगाम लगाना सरकार के लिए टेढ़ी खीर जैसा नज़र आता है। बढ़ती महंगाई को काबू में करने के लिए सरकार किस तरह के कदम उठाती है यह तो वित्तमंत्री की कुशलता पर निर्भर है लेकिन इससे हाशिये पर जाने वाली कांग्रेस को एक और मुद्दा जरूर मिल सकता है।

हालांकि जापानी येन की बनिस्बद रूपया अच्छे स्तर पर है ऐसे में भारतीय बाजार को जरूर कुछ बल मिल सकता है। बाजार की चाल के कारण अब उपभोक्ताओं को ऋण के बदले दिए जाने वाले ब्याज की दर में कटौती की सौगात मिलना भी मुश्किल लग रहा है ऐसे में सस्ता घर खरीदने वाले फिर मुश्किलों में आ सकते हैं।

हालांकि देश के बाजारों को संभालने और देश में महंगाई की दर को कम करने के लिए सबसे अच्छा उपाय स्वदेशी को बढ़ावा देकर यहां उत्पादित प्रोडक्ट्स को देश में खपाए जाने के साथ विदेशों में निर्यात किए जाने का है। ऐसे में देश में आने वाला विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़ेगा।

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