घर आये मेहमान का ना करे अपमान

घर आए मेहमान को भगवान के समान माना जाता है.अतिथि के सत्कार को लेकर शिवपुराण में 4 ऐसी बातें बताई गई हैं, जिनका पालन किया जाए तो मनुष्य को अतिथि को भोजन करवाने का फल जरूर मिलता है.

1-मेहमान को भगवान के समान माना जाता है. अपवित्र शरीर से न भगवान की सेवा की जाती है और न ही मेहमान की. किसी को भी भोजन करवाने से पहले मनुष्य को शुद्ध जल से स्नान करके, साफ कपड़े धारण करना चाहिए. अपवित्र या बासी शरीर से की गई सेवा का फल कभी नहीं मिलता है.

2-घर आए मेहमान को भोजन करवाने के बाद कुछ न कुछ उपहार में देने का भी विधान है. अपनी श्रद्धा के अनुसार मेहमान को उपहार के रूप में कुछ जरूर देनी चाहिए. अच्छी भावनाओं से दिया गया उपहार हमेशा ही शुभ फल देने वाला होता है.

3-मनुष्य को कभी भी घर आए अतिथि का अपमान नहीं करना चाहिए. कई बार मनुष्य क्रोध में आकर या किसी भी अन्य कारणों से घर आए मेहमान का अपमान कर देता है. ऐसा करने पर मनुष्य पाप का भागी बन जाता है. हर मनुष्य को अपने घर आए मेहमान का अच्छे भोजन से साथ-साथ पवित्र और मीठी वाणी के साथ स्वागत-सत्कार करना चाहिए.

पुरे विधान के साथ करे भगवान का जाप

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