कर्नाटक में संतो को चाहिए चुनाव का टिकट

कर्नाटक में संतो को चाहिए चुनाव का टिकट

जातिगत राजनीति में चुनाव के दौरान नेताओं का धर्म गुरुओं के चक्कर लगाना आम बात है मगर कर्नाटक में इसके उलट हो रहा है यहां कई धार्मिक नेता आगामी चुनावों के टिकट के लिए नेताओं के चक्कर लगा रहे है. ऐसा शायद इसलिए भी है क्योकि यूपी में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद संतों का सियासत की ओर झुकाव बड़ा है. इसी लालसा के साथ उडुपी के प्राचीन श्रीकृष्ण मठ के आठ संतों में से एक लक्ष्मीवरा तीर्थ स्वामी भी सामने आये है. तीर्थ स्वामी ने पहले ही घोषणा कर दी है कि अगर बीजेपी ने उन्हें उडुपी विधानसभा सीट से टिकट नहीं दिया, तो वो निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगे. हालांकि उडुपी के पूर्व बीजेपी विधायक रघुपति भट उनकी उम्मीदवारी का विरोध कर रहे हैं.

शिरूर मठ के लक्ष्मीवरा तीर्थ स्वामी काफी समय से विवादों में रहे हैं. लक्ष्मीवरा तीर्थ स्वामी ने कहा, "चुनावों में संत क्यों नहीं लड़ सकते हैं? हम लोगों पर कोई पाबंदी नहीं है. हम लोगों की बेहतर तरीक़े से सेवा दे सकते हैं. बीजेपी बेंगलुरु और दिल्ली में अच्छा कर रही है, लेकिन उडुपी में बीजेपी ने अच्छा नहीं किया है. अगर वे मुझे टिकट देते हैं, तो मैं बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ूंगा. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो मैं एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ूंगा." उडुपी से 70 किलोमीटर दक्षिण में एक और संत ने बीजेपी से टिकट की जुगाड़ में है. मैंगलोर के पास वज्रदेही मठ के राजाशेखरानंद स्वामी ने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है कि संत भगवा कपड़े पहन कर राजनेता बनने के सपने देखे.

इसी क्रम में दलित संत मद्रा चन्नी स्वामी ने भी चित्रदुर्गा जिले में होलकेरे (आरक्षित) सीट से बीजेपी की टिकट की मांग करते हुए दावा किया है कि वो यहां से सामाजिक कल्याण मंत्री एच अंजनेय के शासन का अंत करेंगे. 

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