धन्वंतरि ने दिया आयुर्वेद का मानव को अनुपम वरदान

दीपावली हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार। उत्साह, उमंग और खुशियों का अवसर यूं तो दीपावली का यह पर्व धनतेरस से ही प्रारंभ हो जाता है। धनतेरस के बाद से ही इस पर्व को लेकर जगमगता का अहसास होने लगता है। हालांकि यह पर्व धन के पूजन और भगवान धन्वंतरिक के पूजन का है। भगवान धन्वंतरि जिन्हें आयुर्वेद का प्रेणता भी कहा जाता है। आज ही के दिन उनकी उत्पत्ती मानी जाती है। आयुर्वेद वह ज्ञान जिसके माध्यम से मानव के शरीर में व्याप्त कफ, पित्त, वात आदि विकारों को दूर कर इनमें संतुलन उत्पन्न किया जाता है।

व्यक्ति में जीवनीय शक्ति का विकास किया जाता है। लोगों को आरोग्य प्रदान किया जाता है। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की प्रिय धातु पीतल का पूजन किया जाता है। इस दौरान पीतल के बर्तन खरीदने का रिवाज़ है हालाँकि अब तो स्टेन लैस स्टील के बर्तन खरीदे जाते हैं। मगर यह पर्व नवीनता का प्रदर्शन करता है। हर बार कुछ नूतन करने की मन में आस रहती है।

हां हम चर्चा कर रहे थे भगवान धन्वंतरि की। आरोग्य के दाता भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान आज ही के दिन अमृत कलश लेकर निकले थे। भगवान धन्वंतरि से आरोग्य का धन मिलता है। सच ही है सच्चा सुख निरोगी काया। जी हां जो काया निरोगी होगी वह अच्छा कार्य कर सकती है। किसी भी व्यक्ति के लिए निरोगी होना बेहद जरूरी है। क्योंकि स्वस्थ्य शरीर में ही स्वस्थ्य मन का वास है। जहां तक आयुर्वेद की बात है यह भारत की एक अति प्राचीन धरोहर है।

प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से मानव शरीर का जिन पंचमहाभूतों पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु, आकाश और तीन तत्वों वात, कफ, पित्त में सामंजस्य स्थापित किया जाता है। इनमें से किसी के भी आधिक्य होने पर शारीरीक प्रकृति प्रभावित होती है। इसे विरेचन, वमन, आदि के माध्यम से भी दूर किया जाता है। मगर सबसे खास बात यह है कि इस विधा में शरीर का प्राकृतिक तरीके से शोधन होता है। यह नैसर्गिक जड़ी - बूटियों पर आधारित है। धन तेरस इस विधा के पूजन का भी दिन है।

वर्तमान में मेडिकल साईंस ने अच्छी प्रगति की है। जिसमें आधुनिक तकनीक और मशीनों का उपयोग कर उपचार किया जा रा है। ऐसे में धनतेरस इस नई विधा का स्वागत करने और उसका पूजन करने का दिन भी बन जाता है। हालांकि अब लोग आयुर्वेद पद्धति से चिकित्सा करने पर लौट रहे हैं। दरअसल उन्हें आयुर्वेद में स्थायी समाधान मिल जाता है।

तो दूसरी ओर यह पद्धति उनके उपचार पर पूरी तरह से असरकारक होती है। हालांकि अब बात सभी पद्धतियों को मिलाकर मानव ओर जीवों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर आ टिकी है। मगर इसमें प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद का खास महत्व है। आयुर्वेद में मौजूद जड़ी - बूटियों से रोग का उपचार जड़वत हो जाता है जिसके कारण लोग इस विधा को पसंद कर  रहे हैं।

आयुर्वेद के ही साथ प्राकृतिक चिकित्सा और योग का बोलबाला है। मानव रोजमर्रा की भागदौड़ में तनाव ग्रस्त हो गया है। ऐसे में 2 मिनट का योग उसे लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है। भगवान धन्वंतरि ने मानव को आयुर्वेद का अनुपम उपहार दिया है। इन सभी चिकित्सा पद्धतियों के मिश्रित संयोजन से मानव और जीवों के कल्याण के लिए कुछ सकारात्मक कार्य किया जा सकता है। 

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