देवशयनी एकादशी पर पढ़े यह कथा, हरिशयन मंत्र और पूजन विधि

Jun 30 2020 05:20 PM
देवशयनी एकादशी पर पढ़े यह कथा, हरिशयन मंत्र और पूजन विधि

आप सभी को बता दें कि हर साल आने वाली देवशयनी एकादशी इस बार (1 जुलाई 2020) को है. इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाएंगे. उसके बाद अगले चार महीने तक शुभ कार्य वर्जित हो जाएंगे. आपको बता दें कि इसे चातुर्मास कहा जाता है और भगवान विष्णु देवउठनी एकादशी के दिन निद्रा से जागते हैं. अब आज हम आपको बताने जा रहे हैं व्रत कथा, हरिशयन मंत्र, पूजन विधि.

व्रत कथा संक्षेप: एक राजा के राज्य में बरसात नहीं हो रही थी. सारे लोग बहुत परेशान थे और अपनी परेशानी लेकर राजा के पास पहुंचे. हर तरफ अकाल था. ऐसी दशा में राजा ने भगवान विष्णु की पूजा की. देवशयनी एकादशी का व्रत रखा. इसके फलस्वरूप भगवान विष्णु और राजा इंद्र ने बरसात की और राजा के साथ-साथ सभी लोगों के कष्ट दूर हो गए. 

हरिशयन मंत्र से सुलाएं भगवान विष्णु को

सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जमत्सुप्तं भवेदिदम्.
विबुद्दे त्वयि बुद्धं च जगत्सर्व चराचरम्.

अर्थ : हे प्रभु आपके जगने से पूरी सृष्टि जग जाती है और आपके सोने से पूरी सृष्टि, चर और अचर सो जाते हैं. आपकी कृपा से ही यह सृष्टि सोती है और जागती है. आपकी करुणा से हमारे ऊपर कृपा बनाए रखें.

पूजन विधि: इसके लिए मूर्ति या चित्र रखें. अब इसके बाद दीप जलाएं. अब पीली वस्तुओं का भोग लगाएं. अब इसके बाद पीला वस्त्र अर्पित करें और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें. अगर कोई मंत्र याद नहीं है तो सिर्फ हरि के नाम का जाप करें. वैसे हरि का नाम अपने आप में एक मंत्र है. इसी के साथ अब जप तुलसी या चंदन की माला से जप करें. अंत में आरती करें.

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