सैन्य साहित्यिक उत्सव में बोले राजनाथ सिंह- भविष्य में भारत के समक्ष होंगी नए किस्म के खतरे

नई दिल्ली: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि अब जंग का तरीका बदल चुका है और नए किस्म के खतरे देश के सामने हैं. उन्होंने इस ओर भी इशारा किया कि आने वाले समय में भारत के सामने नई किस्म की चुनौतियां हो सकती हैं. राजनाथ सिंह ने यह बात सैन्य साहित्यिक उत्सव के दौरान कही. कोरोना काल में राजनाथ सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसमें शामिल हुए.

राजनाथ सिंह ने कहा कि दूसरे नजरिए से मेरे लिए यह इवेंट बेहद जरूरी है. बदलते समय के साथ खतरों और युद्ध के तरीकों में परिवर्तन हो रहा है. आने वाले समय में सुरक्षा से जुड़े अलग मुद्दे हमारे सामने हो सकते हैं. यह तीन दिवसीय समारोह का चौथा संस्करण है. आज यानी शुक्रवार को उसका प्रथम दिन था. इसकी थीम ‘जय जवान, जय किसान’ रखी गई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारे देश में राष्ट्रीयता की भावना से साहित्य लिखे जाने की प्राचीन परंपरा रही है. हिंदी हो या पंजाबी, या फिर गुजराती, तक़रीबन सभी भाषाओं में ऐसे लेखन हुए हैं, जिन्होंने अपने दौर में लोगों के अंदर स्वदेश प्रेम की भावना को जागृत और विकसित किया.

उन्होंने कहा कि मिलिट्री लिटरेचर को आमजन से जोड़ने के पीछे, खुद मेरी गहरी दिलचस्पी रही है. मेरी बड़ी इच्छा है कि हमारी आने वाली पीढ़ियां, हमारे देश के इतिहास, खासकर सीमाई इतिहास को जानें और समझें. इसलिए रक्षा मंत्री का पद ग्रहण करने के साथ ही, मैंने बकायदा एक कमेटी का गठन किया था. यह हमारे सीमाई इतिहास, उससे संबंधित युद्ध, शूरवीरों के बलिदान और उनके समर्पण को सरल और सहज तरीके से लोगों के सामने लाने की दिशा में कार्य कर रही है.

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