अगर लोग सरकार से डरने लगें तो ये लोकतंत्र नहीं बल्कि तानाशाही है- पूर्व मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा

Dec 08 2018 06:12 PM
अगर लोग सरकार से डरने लगें तो ये लोकतंत्र नहीं बल्कि तानाशाही है- पूर्व मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा

नई दिल्ली: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि अगर आवाम सरकार से डरने लगे तो समझ जाना चाहिए कि ये लोकतंत्र नहीं बल्कि तानाशाही है. इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'हम एक सभ्य समाज में निवास करते हैं और सभ्यता को आगे बढ़ते रहना चाहिए. न्याय, समानता और स्वतंत्रता एक कानून के अंतर्गत चलने वाली सोसायटी का अहम् अंग है. इसके साथ ही सामजिक बदलाव भी होते हैं, लेकिन न्याय का काम भी समाज में भाईचारा बरक़रार रखना है.'

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पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा ने कहा, 'एक बेहतर समाज सामाजिक आज़ादी के बिना संभव नहीं है. मैं हमेशा युवाओं से कहता हूं कि उन्हें देश का संविधान पढ़ना चाहिए और उसी के अनुसार जीवन जीने की कोशिश करनी चाहिए.' वहीं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बोलते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा कि, 'विचारों का आजादी से आदान-प्रदान करना बेहद आवश्यक है, ये सबसे बेहतर उपहार भी है.

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उन्होंने कहा था कि जेफरसन ने कहा था, जब की सरकार लोगों से डरती है तो ये आजादी है, लेकिन जब जनता सरकार से डरे तो ये तानाशाही है. जब भी आप जबरदस्ती अपने मन का न्याय पाने का प्रयास करते हैं तो असल में उसका मतलब ही बर्बाद कर देते हैं.' महात्मा गांधी का हवाला देते हुए पूर्व सीजेआई ने कहा है कि, 'गांधी जी ने कहा था कि अमेरिका ने अपनी आजादी हिंसा से प्राप्त की थी, लेकिन भारत ने अहिंसा के जरिए अंग्रेजों को लौटने के लिए मजबूर कर दिया.'

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