केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान, 5 साल के बच्चों को मास्क की नहीं है जरूरत

Jun 10 2021 12:16 PM
केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान, 5 साल के बच्चों को मास्क की नहीं है जरूरत

कोरोना संक्रमण को लेकर 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए केंद्र सरकार ने नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। इन दिशा निर्देशों में बच्चों को रेमडेसिविर इंजेक्शन देने से सख्त मना किया गया है तथा इतना ही नहीं यह भी बताया गया है कि 5 वर्ष या इससे कम आयु के बच्चों को मास्क लगाने की आवश्यकता नहीं है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट बताया गया है कि Remdesivir का उपयोग बच्चों पर नहीं करना है। एसिंप्‍टोमेटिक एवं माइल्ड कैटेगरी के बच्चों में किसी प्रकार की कोई जांच की आवश्यकता नहीं है, जैसे- CBC, LFT, KFT, यूरीन रूटीन। इन जांचों की आवश्यकता केवल मॉडरेट और सीवियर बच्चों को होती है। माइल्ड लक्षणों में ‘ऑक्सीजन सैचुरेशन कमरे में 94 प्रतिशत या इससे अधिक, गले में समस्यां, खांसने पर सांस लेने में समस्यां का न होना’ सम्मिलित है। इसका इलाज- बुखार में 4-6 घंटे पर पैरासिटामोल देना, खांसी के लिए गर्म पानी से गरारे करना है। मॉनिटरिंग चार्ट- रेस्पिरेटरी रेट (2-3 बार), सांस की समस्यां, बुखार, बीपी, SpO2, नाखून या होंठ का नीला, छाती खींचने को लेकर प्रातः 8 से रात 8 बजे तक 4 बार करें।

6 मिनट के वॉक टेस्ट के क्या हैं लाभ?
आइसोलेशन में गए बच्चों से परिवार के सदस्य कांटेक्ट में रहें। सकारात्मक बातचीत करें। फोन या वीडियो कॉल का सहारा लिया जा सकता है। मॉडरेट कैटेगरी इन्फेक्शन (SpO 2: 90-93 प्रतिशत)। इसमें निमोनिया की शिकायत हो सकती है, इसलिए इसपर निगरानी रखने की आवश्यकता है। एसिंप्‍टोमेटिक और माइल्ड कैटेगरी इन्फेक्शन के बच्चों में ऑक्सीजन सैचुरेशन को समझने के लिए घर पर 6 मिनट वॉक टेस्ट कराया जा सकता है। 6 मिनट वॉक टेस्ट (12 वर्ष से ऊपर के बच्चे घर के बड़े की देखरेख में करें), ये कार्डियोपल्मोनरी स्थिति को समझने को लेकर क्लीनिकल टेस्ट का एक ढंग है। इसमें बच्चे की अंगुली में पल्स ऑक्सीमीटर लगा दें तथा कमरे में छह मिनट निरंतर चलने के लिए कहें। इस के चलते ऑक्सीजन सैचुरेशन के स्तर को देखें। यदि 94 प्रतिशत से वो कम हो जाता है या फिर सैचुरेशन में 3-5 प्रतिशत ड्रॉप होता है अथवा चलने पर बच्चे को सांस की समस्यां महसूस होती है तब हॉस्पिटल में दाखिल करने की नौबत आ सकती है।

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