काग के भाग बड़े सजनी हाथ से ले गयो माखन रोटी

Feb 14 2015 12:45 AM
काग के भाग बड़े सजनी हाथ से ले गयो माखन रोटी
दिल्ली की गादी पर ’आम आदमी’ ’जम’ गया है....! ’आम आदमी’ ने अच्छों अच्छों को धुल चटाई और यह बता दिया कि जब रावण का घंमड नहीं बरकरार रहा तो फिर तुम किस खेत की मूली हो बच्चू....! जनता तो जनता होती है इसलिये आमजन उसके शब्दकोष में महत्वपूर्ण स्थान रखता है...., लिहाजा दोबारा मौका दे दिया...लो संभालो पूरे पांच साल दिल्ली, अबकी बार 49 दिनों में यदि भागने का प्रयास किया तो जो हालत ’कांग्रेस’ की हुई या फिर अभी दिल्ली में ’भाजपा’ की हुई, ’आप’ कहीं दिखेंगी तक नहीं अर्थात इतिहास में दफन हो जायेगी कि कभी दिल्ली में ’आप’ हुआ भी करती थी.....! 
 खैर जो भी हुआ जनता के विश्वास से हुआ....कुल मिलाकर अरविंद केजरीवाल के भाग्य बड़े है और यही कारण है कि ’सजनी’ के हाथ से ’सत्ता’ रूपी ’माखन रोटी’ छिनकर ले भागा.....! अर्थात काग के भाग बड़े सजनी अरे हाथ से ले गयो माखन रोटी.....! निश्चित ही जब से चुनाव के परिणाम आये है.... कमल’ वालों को ’आप’ वाले न जाने क्या...क्या नजर आ रहे होंगे....! अरविंद जी ! अब सत्ता की भूख के चक्कर में दिल्लीवासियों को मत भूल जाना......! भले ही केजरीवाल ने सरकार बना ली हो परन्तु जीत पर इतना ना इतराओ क्योकि कठपुतली तो नमो के ही हाथ के रहोगे..! 

 किरण के डिल से उतर गये भैरू..... 

 अपनी ’पूर्व वर्दी वाली’ किरण को राजनीति का ऐसा चस्का लगा कि....ऐसा लगा कि....! लेकिन फिलहाल किरण के ’डिल’ से राजनीति के ’भैरू’ उतर गये होंगे....! कोस रही होगी....मोदी तेरे प्यार में क्या-क्या न किया....केजरी को छोड़ा....अन्ना को छोड़ दिया.... फिर भी कुर्सी का सुख नहीं मिला....! कहते है भाग्य और समय के पहले किसी को कुछ मिलता नहीं है, अतः आपने कैसे सोच लिया कि चंद दिनों में ही आप दिल्ली की गादीपति हो जायेगी....! रोटी बेलने का यह अर्थ तो नहीं हो सकता है कि ’राजनीति के पापड़’ बेलने से आपको मुक्ति मिल जायेगी....! खैर आपने खूब किला लड़ाया....परंतु आपको आपके नये नवेले साथियों ने ही लड़खड़ा दिया.....! 

 कितने आदमी थे....हुजुर.... 

 बापड़े केजरीवाल के वे भी क्या दिन थे.....जब अंडे टमाटर खाने के साथ ही चेहरे को काला पीला कर ’हुलिया’ तक बदल डाला गया....! बावजूद इसके उनकी सहनशीलता की दाद देना होगी.....! अब तो मैं हूं यहां का राजकुमार....देख लूंगा एक-एक.को...चुन-चुनकर.....! मनीष कितने आदमी थे.....हुजुर....तीन....हाॅं...हाॅ...तीन....! देख लूंगा एक-एक को....पांच प्रश्नों में उलझाते हो.....लेकिन आ अब देखे जरा किसमे कितना है दम....’आप’ है हम्म! 

 अब बस भी यार मांझी... 

 मांझी ने नीतीश और शरद के दिन का चैन और रातों की नींद हराम कर रखी है.....! कुर्सी से ऐसे चिपके बैठे है जैसे फेवीकोल का जोड़ हूं...आसानी से टूटूंगा नहीं.....! फिर भी जोर लगाकर हईशा....! अब बस भी करो यार मांझी....महागलती हो गई थी जो तुम्हे सीएम की कुर्सी के गले लगा दिया....! सत्ता और कुर्सी का सुख ऐसा ही होता है....जो चखे वो भी पछताये और जो न चखे वे भी पछताये....! अब नीतीश और मांझी आपस में तय कर लें कि कौन अधिक पछता रहा है....! 

 इक बूत से मोहब्त करके..... 

 लो ! मोदीजी का मंदिर बन गया.....मोदी जी को ही पता न चला....! पता चला तो ’अपने भक्तों’ को हड़काया.....! जीवित हूं....जीवित ही रहने दो.....इक बूत से मोहब्बत करते हो...! भारतीय संस्कृति, महापुरूषों तक का उदाहरण देकर समझाया, परंतु ’भक्तों’ को समझ में नहीं आया....! क्योकि मोदी भक्तों की नजरों में ’महान देवता’ है, ’चमत्कारी देवता’ है...! चलो नमो ने तो भक्तों पर नाराजगी व्यक्त कर दी, परंतु ’सोनिया माता’ और ’माया देवी’ ’जाग्रत’ नहीं हुई है। वैसे भी फिलहाल ये ’राजनीति की धरती’ से ’अंतरध्यान’ है! अरे जब अपने ही धरमसांटे नहीं पूछ रहे है तो ’जीवित के बूत’ को पक्षियों का घरोंदा बनने दो..! 

 और अंत में कांटा लगा...हाय लगा... 

 जिसने छो़ड़ा था आप का साथ, जिसने लिया था कमल का साथ, अब पछता रहें होंगे...नासपीटे....बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी.....जो ’चमक’ में आ गये....! लगा न कांटा....हाय लगा...!