क्या केंद्र ने किया था पेगासस से करार ? विपक्ष के सवालों को लगातार टाल रही सरकार

नई दिल्ली: पेगासस स्पाइवेयर और इसके इस्तेमाल पर जब सरकार के रुख की बात आती है, तो सरकार इस पर कुछ कहने से बच रही है. लोकसभा में सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 28 नवंबर 2019 को अपने पूर्ववर्ती रविशंकर प्रसाद की ओर से कही गई बातों को असरदार तरीके से कहा. रविशंकर प्रसाद उच्च सदन में जवाब दे रहे थे, जब मीडिया ने व्हाट्सएप के खुलासे पर रिपोर्ट की थी कि पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता पेगासस का इस्तेमाल करने वाले ऑपरेटर्स के निगरानी के निशाने पर थे.

रविशंकर प्रसाद प्रसाद और अश्विनी वैष्णव दोनों ने अब विपक्ष के सदस्यों की ओर से उठाए गए अहम सवालों को टाल दिया. ये सवाल है कि क्या सरकार या उसकी एजेंसियों को पेगासस मिला और यदि हां, तो इसके इस्तेमाल की शर्तें क्या थीं? इसकी जगह दोनों ने इस दावे को दोहराने के लिए कानून की धाराओं का हवाला दिया कि सभी इलेक्ट्रॉनिक इंटरसेप्शन उचित प्रक्रिया का पालन करते हैं. पेगासस जासूसी मामले में सामने आए हाई-प्रोफाइल नामों और सरकार द्वारा विपक्ष की तरफ से उठाए गए सवालों को पूरी तरह से खारिज करने को देखते हुए अब ये मामले और आगे जा सकता है. 

2019 की बहस इस बात का पूर्वाभास है कि आगे क्या हो सकता है. उस वक़्त कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए उच्च सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि व्हाट्सएप हैक में सिर्फ तीन संभावनाएं हो सकती हैं, या तो सरकार कानूनी रूप से जासूसी में लगी हुई है, या इसे अवैध रूप से करने की इजाजत दी गई है या ये सरकार की जानकारी के बगैर अवैध रूप से किया गया था.

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