राज्य में खरीदा जाने वाला धान अब नहीं भेजा जाएगा बाहर: सीएम सोरेन

रांची: 15 दिसंबर से झारखंड (Jharkhand) में किसानों से धान की खरीदारी आरम्भ हो जाएगी. इसके लिए सभी शहरों में आवश्यक व्यवस्था कर ली गई हैं. शहरों के उपायुक्तों को निर्देश दिया गया है कि धान अधिप्राप्ति केंद्रों पर सरकार की ओर से तय नियमों के मुताबिक, किसानों से खरीदारी की जाए. एक किसान से अधिकांश 200 क्विंटल धान की ही खरीदारी होगी. इस बीच सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने कहा है कि प्रदेश में खरीदा जाने वाला धान अब बाहर नहीं भेजा जाएगा, इसका यहां चावल बनेगा. इसके लिए 29 दिसंबर को सरकार प्रदेश में 14 राइस मिलों का नींव रखेगी. 

किसानों को वक़्त पर धान के दामों का भुगतान हो जाए, इसके लिए सरकार ने स्टेट फूड कॉरपोरेशन को 1522 करोड़ रुपये का लोन लेने की स्वीकृति दी है. इस बार किसानों को उनके धान के कुल दाम का 50 फीसदी भाग तत्काल दे दिया जाएगा तथा बाकी की रकम 3 माह के भीतर दी जाएगी. सरकार ने निगम को निर्देश दिया है कि अन्नदाताओं को धान के दामों का भुगतान निर्धारित किए गए नियम तथा समय सीमा के अंदर प्रत्येक स्थिति में कर दिया जाए. बीते खरीफ फसल चक्र के चलते भी निगम ने किसानों को वक़्त पर भुगतान के लिए 421 करोड़ का लोन लिया था. निगम का दावा है कि प्रदेश में प्रथम बार किसानों को उनसे खरीदी गई फसल के बदले में पूरी रकम का भुगतान कर दिया गया है. 

वही धान खरीदारी की जो दरें निर्धारित की गई हैं, उसके मुताबिक साधारण धान के लिए 2050 रुपये प्रति क्विंटल तथा ग्रेड ए किस्म के लिए 2070 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अन्नदाताओं को भुगतान कराया जाएगा. इस रकम में केंद्र द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य और प्रदेश सरकार की तरफ से दिया जाने वाला बोनस दोनों सम्मिलित है. प्रदेश के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि साल 2021-22 के खरीफ फसल चक्र के चलते सरकार ने प्रदेश के किसानों से 8 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. 

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