'क़ुरान घर में पढ़ाएं, मदरसों को ख़त्म कर देना चाहिए...', असम CM बोले- मुस्लिमों को अच्छी शिक्षा चाहिए

गुवाहाटी: असम के सीएम हिमंता ने मदरसा शब्द ही खत्म करने की वकालत करते हुए कहा कि मदरसे में बच्चों को एडमिशन दिलवाना ही मानवाधिकारी का उल्लंघन है। सीएम सरमा ने शनिवार (21 मई 2022) को पाञ्चजन्य के दिल्ली स्थित एक सेमिनार में उक्त बातें कही हैं। सीएम सरमा ने मदरसों को मानवता का दुश्मन करार देते हुए हुए कहा कि, 'ये मदरसा शब्द ही विलुप्त हो जाना चाहिए। जब तक मदरसा दिमाग में घूमेगा तब तक बच्चा कभी डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन सकेगा।'

उन्होंने कहा कि अगर ये बातें बच्चों को सिखाई जाएँ, तो बच्चे खुद ही मदरसे में न जाएँ। मदरसे में बच्चों का एडमिशन ही मानवाधिकार के उललंघन के लिए करवाया जाता है। आप खूब कुरान पढ़ाइए, मगर सबसे अधिक गणित और विज्ञान पढ़ाएँ। बच्चों को आप घर में मजहबी बातें पढ़ाएँ।' उन्होंने आगे कहा कि, 'स्कूलों में वही पढ़ाया जाना चाहिए जो छात्रों को डॉक्टर, वैज्ञानिक और प्रोफेसर बनाए। आज जो मुस्लिम कुरान को रट चुके हैं, ये सब के सब किसी समय हिन्दू थे। यदि किसी मुस्लिम बच्चे की पढ़ाई में बहुत अच्छी मेरिट है, तो उसका श्रेय भी मैं उसके हिन्दू इतिहास को ही दूँगा।'

बता दें कि 2020 में असम ने धर्मनिरपेक्ष शिक्षा प्रणाली को सुविधाजनक बनाने के लिए सभी सरकारी मदरसों को भंग करने और उन्हें सामान्य शैक्षणिक संस्थानों में बदलने का निर्णय लिया था। इस साल गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम निरसन अधिनियम, 2020 को कायम रखा, जिसके तहत राज्य के सभी प्रांतीय (सरकारी वित्त पोषित) मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदला जाना था। राज्य द्वारा वित्त पोषित मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदलने के सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए 2021 में 13 लोगों ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की थी।

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