एक निर्भीक फ़्रांसिसी सेनानायक, नेपोलियन बोनापार्ट

नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस की क्रांति की पैदाइश था, जिसने यूरोप के राजाओं और ज़ारों की सत्ता को ललकारा था. उसका जीवन 1769 से लेकर 1821 तक, कुल 52 साल का रहा, पर उसकी कहानी अनंत सी लगती है. इस कहानी के सिर्फ दो ही हिस्से थे- जीत या हार. कहीं ऐसा पठार नज़र नहीं आता जहां यह कहा जा सके कि वो कुछ देर ठहरा हो. नेपोलियन हर वक्त सिर्फ चढ़ा या उतरा, लेकिन रुका नहीं.

एक बार जब उन्होंने आलपास पर्वत को पार करने का मन बनाया तो लोगों ने कहा सम्राट पागल हो गये हैं. असल में जिस पर्वत को नेपोलियन पार करना चाहते थे, वह एक विशाल और गगनचुम्बी पहाड़ था. इस पर चढ़ाई करने का मतलब था मौत को दावत. बावजूद इसके नेपोलियन ने अपनी सेना को चढ़ाई का आदेश दिया था. अपनी सेना के साथ जब वह पर्वत पर चढ़ने का प्रयास कर रहे थे तभी उनके पास आकर एक बुजुर्ग महिला ने टोकते हुए कहा, क्यों मरना चाहते हो ? यहां जितने भी लोग आए हैं, वो मुंह की खाकर यहीं रहे गए , अगर अपनी ज़िंदगी से प्यार है तो वापिस चले जाओ. 

लेकिन नेपोलियन उस औरत की बात से हताश होने की बजाए प्रेरित हो गया और उसने अपने गले से एक हीरों का हार उतारकर उस महिला को दे दिया और कहा कि तुमने मुझे प्रेरित किया है, मेरा उत्साह दुगना किया है, अगर मैं ज़िंदा रहा तो तुम मेरी जय-जयकार करना और अगर मर गया तो ये हार तो तुम्हे मिल ही चुका है. इतना कहकर नेपोलियन अपनी सेना के साथ पहाड़ कि तरफ बढ़ने लगा, कई दिनों के बाद, बर्फीले तूफ़ान, जानवर और कई समस्याओं से लड़ते हुए आखिर नेपोलियन ने वह पहाड़ पर कर लिया. इस विजय के बाद से नेपोलियन की सेना ने कभी अपने सरदार की आज्ञा पर संदेह नहीं किया और निरंतर विजय के पथ पर बढ़ते रहे.  आज ही के दिन 1818 में उनकी मौत हो गई थी, आज 200 साल बाद भी उनकी मौत पर संशय बरकरार है,  उनकी मौत का कोई ठोस कारण अभी तक सामने नहीं आया है. 

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