बड़ा अनमोन है जवानों का यह बलिदान

Feb 05 2016 08:26 PM
बड़ा अनमोन है जवानों का यह बलिदान

विश्व के दुर्गम रण क्षेत्रों में प्रमुख माने जाने वाले सियाचीन ग्लैशियर में भारतीय सीमाओं की रक्षा करने वाले जवान बेहद विपरीत परिस्थितियों में रहते हैं। सर्दियों में इनकी मुश्किल बढ़ जाती है। इन दिनों वहां जबरदस्त बर्फ जमी हुई है और हिमस्खलन के कारण करीब 10 जवान लापता हो गए। इन जवानों के शवों का अभी तक पता नहीं चला है। मगर यहां पर दुर्गम परिस्थितियों के जीवन की जानकारी इन जवानों के जीवन से मिलती है।

ये जवान बड़ी मेहनत से रण क्षेत्र की रक्षा करते हैं। सबसे बड़ी बात है यहां का मौसम विपरीत परिस्थ्तिियों वाला होता है। जिसके कारण फौजियों की अधिक जान जाती है। भारतीय सेना ने कई वर्षों में 1500 से अधिक सैनिक इस रण क्षेत्र में गंवा दिए हैं। इन सैनिकों के लिए यूं तो कई तरह की सुविधाऐं उपलब्ध करवाई गई हैं। बर्फ पर चढ़ने के लिए सैनिकों को विशेष प्रकार के औजारों की सहायता लेनी पड़ती है।

तो दूसरी ओर इसके सूट इन्हें सर्द मौसम से बचाते हैं। सैनिकों को सफेद बर्फ और सर्दी के बीच विशेष प्रकार के गाॅगल भी लगाने पडते हैं जो इनकी आंखों की रक्षा करते हैं। इतनी विषम परिस्थितियों में कई बार तापमान माईनस 10 डिग्री तक भी चला जाता है। ऐसे में सैनिकों के लिए बहुत मुश्किल हो जाती है।

यही नहीं इन सैनिकों को पीने का पानी भी बड़े जतन से जुटाना पड़ता है। सैनिकों को पीने के पानी के लिए बर्फ को ही गर्म कर पिघलाना पड़ता है। ये पानी को शुद्ध कर पीते हैं। इसके बाद भी सैनिक डंटकर सरहद की रक्षा करते हैं। यहां सैनिकों को भोजन का बंदोबस्त करने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इतनी ऊॅंचाई पर हथियार और युद्धक सामग्री के साथ इन सैनिकों का पहुंचना बेहद मुश्किल होता है कई बार तो इन सैनिकों को अपने दोनों हाथों में विशेष यंत्र पकड़कर बर्फीले पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता है ऐसे में सैनिकों को भोजन सामग्री कम ही रखनी पड़ती है।

अधिकांश सैनिक मौसम की विपरीत परिस्थितियों के चलते शहीद हो जाते हैं लेकिन भारत के इस दुर्गम रण क्षेत्र की रक्षा सेना वर्षों से करते आ रही है। कई बार सैनिकों के टेंट तक बर्फीले तूफान में ढंक जाते हैं। तो बर्फीले तूफान से टेंट के बाहर रहने वाले सैनिकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह तूफान अपने साथ सबकुछ बर्फ में मिला देता है। जिसके कारण सैनिकों के लिए बहुत मुश्किल होती है।