कोहरे सा छा जाता धुंआ, पटाखे चलाना नहीं इतना आसान!

दीपावली का त्यौहार अब बस कुछ ही दिनों की दूरी पर है वैसे तो गुरूवार से ही दीपपर्व का शुभारंभ हो जाएगा मगर असली रौनक धनतेरस से नजर आएगी। ऐसे में पटाखों और आतिशबाजी का इंतजाम भी लोगों द्वारा किया जाएगा। मगर इसी बीच आतिशबाजी से होने वाले नुकसान पर किसी का ध्यान नहीं होगा। प्रतिवर्ष दीपावली की अगली सुबह वातावरण में इतना धुंआ होता है कि यह कोहरे की तरह नज़र आता है।

दरअसल दीपपर्व पर जो पटाखे चलाए जाते हैं उनसे हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है। कार्बन प्रभाव वाली ये गैसें वातावरण में अपना विषैला प्रभाव छोड़ती हैं। ऐसे में इनसे ओजोन परत को नुकसान होना भी संभावित है। वातावरण में बारूद की गंध अलग ही घुल जाती है जिससे कई बार लोग ठीक से सांस तक नहीं ले पाते हैं। जिन लोगों को कुछ परेशानियां हो जाती हैं उनके लिए बाहर निकलना भी मुश्किल होता है।

हालांकि अब कुछ लोगां ने इस मामले में जागरूकता अपनाई है और अब वे लोग पटाखे चलाने की बजाए लोगों से मिलकर और उन्हें उपहार भेंट कर और उनके साथ पकवानों का आनंद लेकर दीपावली मनाते हैं। अब पटाखों से होने वाले नुकसान की बात समझते हुए कुछ लोग जागरूक हुए हैं मगर अभी भी बड़े पैमाने पर लोग आतिशबाजी के नाम पर फिजूलखर्ची करते हैं और नतीजा पर्यावरण को होने वाले नुकसान के तौर पर सामने रहता है।

कुछ लोगों ने इस बात को समझा है और अब पर्यावरण संरक्षण का अलख जगाया जा रहा हैै। ऐसे लोग अभावग्रस्त लोगों के घरों को दीयों से रोशन करने में लगे रहते हैं और पटाखों से होने वाले नुकसान को लेकर भी सभी को जागृत करते हैं।

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