यही दो सुख व्यक्ति की सभी इच्छाओं को पूरा करते है

हिन्दू शास्त्रों में व्यक्ति के लिए दो सुखों को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, एक स्वस्थ शरीर व दूसरा घर में माया. इसके संबंध में एक प्राचीन कहावत है “पहला सुख निरोगी काया और दूसरा घर में माया”, यदि किसी व्यक्ति के जीवन में ये दोनों सुख होते है, तो उसे और किसी भी चीज की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि बाकी के सभी सुख इसी के अंतर्गत आते है. और यदि व्यक्ति के जीवन में इन दोनों सुखो में से एक का भी भाव होता है, तो दूसरा अपने आप ही समाप्त हो जाता है. 

तात्पर्य- यदि व्यक्ति के पास अपार धन सम्पदा है, किन्तु वह स्वस्थ नहीं है, तो यह अपार धन सम्पदा उसके किसी मतलब की नहीं होती और यदि उसके पास धन सम्पदा नहीं है, तो उसका स्वस्थ शरीर किसी काम का नहीं. क्योंकि स्वस्थ शरीर वाला व्यक्ति धन सम्पदा के दुखों को भोगने से वंचित रहता है.

आज का समय ऐसा है, की हर व्यक्ति अधिक से अधिक धन इकठ्ठा करने की दौड़ में सबसे आगे रहना चाहता है और इन सब कारणों से वह अपने स्वास्थ पर ध्यान देना भूल जाता है. जिससे उसे कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है और अपनी कड़ी मेहनत से जो धन उसने संचय किया था, वह सब चिकित्सालय में देना पड़ता है. जिसके कारण वह धन भी व्यर्थ हो जाता है. इन सब बातों का ध्यान रखते हुए व्यक्ति को अपने स्वास्थ को ध्यान में रखते हुए अपने कार्य करना चाहिए, जिससे आप अपने द्वारा कमाए गए धन का उपयोग अपनी इच्छा के अनुसार कर सकते है.

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