752 चूल्हों पर बनता है जगन्नाथ रथयात्रा का महाप्रसाद

उड़ीसा में स्थित जगन्नाथपुरी सबसे पवित्र स्थल में गिना जाता है. यहाँ हर साल भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है. इस बार यह रथयात्रा 14 जुलाई 2018 से शुरू होने वाली है. इस रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ को रथ पर विराजित कर भ्रमण कराया जाएगा. यह रथयात्रा बहुत ही पवित्र मानी जाती है और इस रथयात्रा में लाखो लोग शामिल होते हैं. यहाँ का प्रसाद काफी शानदार होता है और वह कड़ी देखरेख के साथ बनाया जाता है. आज हम आपको इस मंदिर की रसोई से जुड़े कुछ रहस्य बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आपको हैरानी होगी.

दुनिया में जगन्नाथ मंदिर की रसोई के सबसे ज्यादा चर्चे हैं क्योंकि यहाँ पर रथयात्रा के दौरान भगवान का भोग काफी बड़ी रसोई में तैयार किया जाता है. इस भोग को बनाने के लिए करीब 500 रसोइए और उनके साथ 300 सहयोगी को काम में लगाया जाता है. कहते हैं कि रसोई में जो भी भोग तैयार किया जाता है वह माता लक्ष्मी की देखरेख में होता है. यहाँ पर भोग के लिए 56 तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं जिनका जिक्र हिन्दू धर्म की पुस्तकों में हैं. हिन्दू धर्म की पुस्तकों में भोग बनाने की जैसी विधि बताई जाती है वैसी ही विधि को अपनाकर भोग तैयार किया जाता है.

भोग पूरी तरह शाकाहारी होता है और उसे बनाने के लिए प्याज और लहसुन का उपयोग तक नहीं किया जाता. रसोई में भोग का सारा खाना लकड़ी के चूल्हे पर पकाया जाता है और उनकी संख्या 752 होती है. जगन्नाथ मंदिर की रसोई में हर दिन करीब 20 हजार लोगों के लिए प्रसाद तैयार किया जाता है, और जब रथयात्रा निकलती है तब करीब 50 हजार लोगों के लिए प्रसाद तैयार किया जाता है.

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