हिमाचल में गिरे सब्जियों के दाम, अर्थव्यवस्था को हो सकता है भारी नुकसान

शिमला: एक तरफ बढ़ रहा कोरोना का कहर न केवल मानवीय जीवन पर संकट बना बैठा है. बल्कि यह वायरस आज भारत की अर्थव्यवस्था पर भी आफत बनता जा रहा है. हर दिन चीजों के दामों में आती कमी ओट कभी एक दम से होती बढ़ोतरी से आज हर कोई परेशान है. व्यापारियों के लिए किसी बड़ी महामारी से कम नहीं है. वहीं ऊपरी शिमला और सिरमौर के गिरिपार इलाकों से मटर की खेप मंडियों में पहुंचना शुरू हो गई है. ठियोग और करसोग क्षेत्रों से अधिक मात्रा में मटर मंडियों में पहुंच रहा है. अप्रैल माह के पहले हफ्ते के मुकाबले सभी मंडियों में मटर की आमद में बढ़ोतरी हुई है. एक अप्रैल सेब तक ढली सब्जी मंडी से ही करीब 130 टन मटर दिल्ली की आजादपुर मंडी में भेजा जा चुका है. छोटी मंडियों में भी मटर की आमद बढ़ने लगी है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शिमला से रोजाना दस से पंद्रह ट्रक दिल्ली भेेेजे जा रहे हैं. सरकार की ओर से किसानों को अपने उत्पादों को छोटे-बड़े सभी प्रकार के वाहनों से मंडियों तक लेे जाने के लिए खुली छूट दी गई है देशभर में लॉकडाउन से बाहरी राज्यो में सब्जियों की कम डिमांड है. इस कारण किसानों को उम्मीद के मुताबिक मटर के दाम नहीं मिल पा रहे हैं. ढली मंडी में मटर 20 से 25 रुपये किलो बिक रहा है. नहोल पंचायत के किसान दिलीप वर्मा, अशोक, आशीष, बलिराम, हीर सिंह, रमेश, वीर सिंह, सहीराम, केवल राम ने बताया कि इस साल मटर की पैदावार और सीजन के मुकाबले अधिक है लेकिन दाम नहीं मिल रहे हैं. अभी तक ढली में 20 से 30 रुपये प्रति किलो से अधिक दर से मटर नहीं बिक सका है. बीते वर्षों में मटर 50 से 80 रुपये किलो तक बिका था. 

वहीं यह भी कहा जा रहा है कि ढली सब्जी मंडी में कोविड 19 को देखते हुए सामाजिक दूरी के नियम को सख्ती से लागू किया जा रहा है . ढली मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान हरीश ठाकुर ने बताया कि किसानों से मंडी में भीड़ जमा न करने की अपील की गई है. 

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