जालियांवाला बाग़ हत्याकांड को पूरे हुए 100 साल, जानिए इस भीषण नरसंहार के बारे में...

Apr 13 2019 08:28 AM
जालियांवाला बाग़ हत्याकांड को पूरे हुए 100 साल, जानिए इस भीषण नरसंहार के बारे में...

13 अप्रैल 1919 बैसाखी का दिन। बैसाखी का त्यौहार वैसे तो पूरे भारत में मनाया जाता है, लेकिन विशेषकर पंजाब और हरियाणा के किसान सर्दियों की रबी की फसल काट लेने के बाद नव वर्ष की खुशियां मनाते हैं। इसी दिन, 13 अप्रैल 1699 को दसवें और आखिरी गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना भी की थी। इसीलिए बैसाखी पंजाब और उससे सटे राज्यों का सबसे बड़ा त्योहार है और सिख इसे सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं। अमृतसर में उस दिन एक मेला सैकड़ों वर्षों से लगता चला आ रहा था जिसमें उस दिन भी सुदूर इलाकों से 
हज़ारों लोग आए थे।

वहीं स्वर्ण मंदिर के पास रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक जनसभा हो रही थी, जिसमें जनरल डायर नामक एक अंग्रेज अफसर ने अकारण उस सभा में मौजूद भीड़ पर गोलियां चलवा दीं। अंग्रेजों ने हजारों निहत्थे भारतीयों पर अंधाधुंध गोलियां चलना शुरू कर दिया। इस नृशंस घटना में ब्रिटिश सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार, 379 लोग मारे गए थे जबकि 1200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। समय के चक्र के साथ आज इस घटना को 100 साल पूरे हो रहे हैं, किन्तु आज भी फिरंगियों के इस वहशीपन के प्रति लोगों के मन में उतना ही पीड़ा और आक्रोश है।

13 अप्रैल, 1919 की ये घटना ब्रितानी इतिहास का वो काला दिन है, जिसे अंग्रेज चाहकर भी नहीं मिटा सकते। हालांकि, कुछ दिनों पहले ही ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने इस घटना पर अफसोस हटते हुए इसे शर्मनाक करार दिया है। किन्तु उस भीषण नरसंहार में जितने लोग शहीद हुए थे और उनकी शहादत के बाद उनके परिजनों को जो जख्म पहुंचे थे, वो इस घटना को शर्मनाक करार देने से नहीं भरेंगे। आज इस घटना के १०० वर्ष पूरे होने पर न्यूज़ ट्रैक परिवार सभी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

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