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हम दर्शन करने के लिये मंदिर में जाते है लेकिन वहां जाकर प्रसाद तो भले ही पुजारी को दे देते है परंतु फूल मूर्ति पर उछालकर हाथ जोड़कर यह एहसास कर लेते है कि हमने फूल चढ़ा दिये है। वास्तव में भगवान के उपर कभी भी फूल फेंकना नहीं चाहिये बल्कि उन्हें अपने हाथों से ही अर्पित करने की जरूरत है।

फूल फंेकने से हो सकता है कि आपके फूल भगवान स्वीकार नहीं करें और आपकी मनोकामना पूरी होने में बहुत देर हो जाये, परंतु फूल को मूर्ति के चरण में रख दिये जाये या हार गले में पहना दिया जाये तो आपको भगवान का आशीर्वाद जरूर मिल सकता है।

वैसे लगभग हर मंदिर में पुजारी रहते है और वे ही भक्तों से हार फूल ले कर भगवान को अर्पित करने का काम भी किया करते है। ऐसी स्थिति में ही अधिकांश श्रद्धालु फूल फेंककर इतिश्री कर लेते है।

संभावना हो तो अपने हाथों से ही फूल चढ़ाये और यदि संभव नहीं हो तो फिर पुजारी को सौंप दें और उनसे फूल चढ़ाने के लिये कहे। फूल फेंके नहीं जाते है, चढ़ाये जाते है, यह बात हमारे बुजुर्ग भी कहते है इसलिये मंदिर में जाने के वक्त इस बात का विशेष तौर पर ध्यान रखा जाये।

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