जिदंगी भर साथ निभाते है

जिदंगी भर साथ निभाते है

ुदगर्ज बनकर जिदंगी में
कई लोग सामने आते है
कुछ घुटन सा संग देकर
अपना बनकर सताते है
सपनो को वो ओझल करके
हरपल हमे तड़पाते है
फिर भी अपना बनकर 
जिदंगी भर साथ निभाते है