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आपका दिल छू लेगी ये शायरियां
आपका दिल छू लेगी ये शायरियां

चिराग़ घर का हो, महफिल का हो कि मंदिर का,
हवा के पास कोई मसलहत नहीं होती
- वसीम बरेलवी 

सहर ने अंधी गली की तरफ़ नहीं देखा,
जिसे तलब थी उसी की तरफ़ नहीं देखा।
- मंजर भोपाली 

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