...तो इसलिए सूर्योंदय से पहले दी जाती है फांसी

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यह तो सभी जानते है कि जेल में मरने वाले से उसकी आखिरी इच्छा पूछी जाती है. इसके लिए जेल में एक एक मैन्यु कार्ड बना होता है जिसमें से आपको एक इच्छा ज़ाहिर करनी होती है लेकिन क्या आप यह जानते है कि एक मुजरिम को फांसी सूर्योदय से पहले ही क्यों दी जाती है? इस सवाल ने कई लोगों को परेशान किया हुआ है. शायद आप भी परेशान होंगे तो चलिए इस वीडियो में यहीं जानते है कि ऐसा क्यों होता है...

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दरअसल, जेल के सभी कार्य सूर्योदय के बाद शुरू होते है इसलिए कोशिश होती है कि सभी नकारात्मक चीज़े सूर्योदय से पहले ही ख़त्म हो जाए. इससे किसी भी व्यक्ति का दिन खराब नहीं होता है और ना ही उसे इस बात का दुःख होता है. खासतौर पर प्रशासनिक कार्यों पर इसका कोई असर ना हो. इस दौरान जेल अधीक्षक, एकज्युकेटिव मजिस्ट्रेट, जल्लाद और एक डॉक्टर मौजूद रहता है, इनके बिना फांसी नहीं दी जाती है.

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फांसी देने से पहले जल्लाद कहता है कि मुझे माफ़ कर दिया जाए, हिन्दू भाइयों को राम-राम, मुसलमान भाइयों को सलाम, हम क्या कर सकते है हम तो हुकुम के गुलाम. इसके बाद करीब 10 मिनट तक मुजरिम को फांसी के फंदे से लटके रहने दिया जाता है. आपको बता दें, पिछले 10 सालों में 37 देश ऐसे है जहाँ फांसी दी गई हो. फांसी देने के मामले में चीन सबसे आगे है. वैसे सभी देशों में फांसी देनें के अलग-अलग नियम होते है.   

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