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जब सुरंग से निकाले जा रहे थे मजदूर पीएम मोदी भी हो गए थे भावुक
जब सुरंग से निकाले जा रहे थे मजदूर पीएम मोदी भी हो गए थे भावुक
style="text-align: justify;">सत्रह दिनों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के उपरांत आखिरकार सभी मजदूर टनल से बाहर निकाले जा चुके है. मंगलवार की शाम आई इस खुशखबरी ने देशभर में खुशी का माहौल पैदा कर दिया. टनल में फंसे 41 मजदूरों के परिवारों के लिए मंगलवार की रात दीपावली की भांति ही बीती. इस दौरान यह बात भी सामने आई कि पीएम नरेंद्र मोदी टनल में चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को लाइव देख रहे थे. पीएम के साथ पूरे कैबिनेट ने रेस्क्यू ऑपरेशन का लाइव टेलीकास्ट भी देखा. जैसे ही टनल में फंसे श्रमिक बाहर आना शुरू हुए तो पीएम बहुत भावुक हुए.
 
रेस्क्यू खत्म होते समय चल रही थी बैठक: महादेव ऐप का चुनावी कनेक्शन, अनुराग ठाकुर ने CM बघेल को घेरा केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस बारें में कहा है कि मजदूरों को निकालने की प्रक्रिया के बीच मंगलवार रात तकरीबन 8 बजे कैबिनेट की बैठक चल रही थी, जब मजदूर बाहर आए तो पीएम मोदी बहुत भावुक थे.
 
अस्पताल पहुंचकर मजदूरों से मिले सीएम:  मजदूरों को बचाए जाने के उपरांत आज उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी चिन्यालीसौड़ अस्पताल पहुंचे और श्रमिकों से मिले. यहां मजदूरों को बचाए जाने के उपरांत मंगलवार शाम लाया गया था. अपनी बैठक के उपरांत धामी ने कहा है कि सभी श्रमिक अच्छी हालत में हैं. जिसके उपरांत उन्हें एम्स ऋषिकेश ले जाया गया, जहां उनका मेडिकल चेकअप हुआ.
 
सिल्कयारा टनल चारधाम परियोजना का हिस्सा: खबरों का कहना है कि सेंट्रल गवर्नमेंट  केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी चार धाम परियोजना का भागों  सिल्कयारा टनल का कुछ भाग 12 नवंबर को लैंडस्लाइड की वजह से ढह गया था. इसके बाद अगले ही दिन टनल के अंदर फंसे 41 मजदूरों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया था. 17 दिन तक चले ऑपरेशन के बाद सभी को 28 नवंबर 2023 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
 
रैट माइनर्स ने तोड़ी सुरंग की आखिरी दीवार: एक दिन पहले यानी 27 नवंबर को टनल ड्रिलिंग के लिए बुलाई गई अमेरिकी ऑगर मशीन भी पूरी तरह से ख़राब हो गई है. उसके ब्लेड टूट गए थे. जिसके उपरांत रैट माइनर्स को बची हुई तकरीबन 10 मीटर की सुरंग खोदने के लिए बुलाया गया था. रेट माइनर्स ने तय वक़्त से भी कम टाइम में सुरंग का आखिरी हिस्सा तोड़ दिया था. इसके बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, असम (एसडीआरएफ) की एक टीम ने फंसे हुए श्रमिकों तक पहुंचने के लिए स्टील शूट की सहायता से प्रवेश किया था. इसके बाद सभी को वहां से निकाल लिया गया था.
 
 
 
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