क्या होते हैं ग्रीन पटाखे, आम पटाखों से किस तरह होते हैं अलग ?

नई दिल्ली: देश में बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या के मद्देनज़र सरकार से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक दीवाली पर आतिशबाजी को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है. इसी बीच चारों ओर ग्रीन पटाखों की चर्चा हो रही है. शीर्ष अदालत ने पटाखों और आतिशबाजी की कुछ शर्तों पर रियायत दी है. जैसे कि त्योहार की रात केवल दो घंटे के लिए रात 8 से 10 बजे तक पटाखे जलाए जा सकेंगे. इसके साथ अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि दिवाली पर कम प्रदूषण वाले ग्रीन पटाखे जलाए और बेचे जाएं. 

बताते चलें कि ग्रीन पटाखे, राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) की खोज हैं. ये आवाज से लेकर दिखने तक सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं, लेकिन इनके जलने से कम प्रदूषण होता है. नीरी ने ग्रीन पटाखों पर जनवरी में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन के उस बयान के बाद रिसर्च शुरू की थी, जिसमें उन्होंने इसकी आवश्यकता की बात कही थी. सामान्य पटाखों की तुलना में ग्रीन पटाखे 40 से 50 फ़ीसदी तक कम हानिकारक गैस उत्पन्न करते हैं. नीरी के मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर साधना रायलू के अनुसार, इनसे हानिकारक गैसें सामान्य से 50 फीसदी तक कम मात्रा में निकलेंगी. ऐसा नहीं है कि इन पटाखों से प्रदूषण बिल्कुल भी नहीं होगा, किन्तु ये उनसे कम हानिकारक हैं. 

डॉक्टर साधना ने मीडिया को बताया कि सामान्य पटाखों के जलाने से भारी मात्रा में नाइट्रोजन और सल्फ़र गैस पैदा होती है, मगर उनके रिसर्च का लक्ष्य इनकी मात्रा को कम करना था. ग्रीन पटाखों में प्रयोग होने वाले मसाले काफी हद तक सामान्य पटाखों से अलग होते हैं. नीरी ने कुछ ऐसे फ़ॉर्मूले बनाए हैं जो हानिकारक गैस कम उत्पन्न करेंगे.

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