वोटर आईडी: वोट नहीं डलवाने की नई राजनीति का जन्म हुआ

बेंगलुरु: आर आर नगर के एक फ्लैट से 10,000 वोटर आईडी कार्ड जा जखीरा मिलने के बाद एक नई बहस शुरू हो गई है. सूत्रों के अनुसार जहा एक समय वोट के लिए नोट दिए जाते थे अब वही वोट नहीं डालने के पैसे दिए जाने का नया फैशन आया है. ये मतदाता के इलेक्टर्स फोटो आइडेंटिटी कार्ड (EPIC) के अदला-बदली के लिए रिश्वत देते हैं. EPIC कार्ड की कीमत अलग-अलग जगहों में भिन्न होती है. जैसे उत्तर कर्नाटक के दूरवर्ती इलाके लंबानी टांडा में इसकी कीमत 100 रुपये है, लेकिन बेंगलुरु के स्लम इलाके में 2,000 रुपये तक हो सकती है. 

हेब्बल के कारपेंटर जिनका नाम नहीं छपने कि शर्त पर उन्होंने कहा,  'मुझसे बीजेपी उम्मीदवारों ने संपर्क किया जिन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं 1000 रुपये के बदले में वोट नहीं देने को तैयार हूं. मैंने कहा- हां, हमारी कॉलोनी में वोट न देने के लिए तैयार होने वालों को कैश के साथ व्हिस्की मिली है.' हालांकि, चुनाव अधिकारियों का कहना है कि वोट को चुराना आसान नहीं है. उन्होंने कहा, 'अतिसंवेदनशीलता मापने पर चुनाव आयोग काम कर रहा है. हमें यह पता लगाना होता है कि कहीं लोगों को वोट देने से तो नहीं रोका जा रहा है. अगर हमें कुछ सबूत मिलते हैं, हमारे पास चुनाव रद्द कराने का अधिकार है.' 

स्पेशल कमिश्नर, चुनाव (बीबीएमपी) मनोज आर रंजन ने कहा, 'हमारे पास लोक प्रतिनिधि अधिनियम 1951 के तहत मजबूत प्रावधान है, जो चुनाव की गड़बड़ियों से निपटता है.' सूबे में होने वाले मतदान के ठीक तीन दिन पहले इतनी बड़ी संख्या में वोटर ID का मिलना और फिर फ्लैट कि मालकिन का खुद को बीजेपी समर्थक बताना और अब ये उक्त खुलासा किस और इशारा कर रहे है जिस पर फ़िलहाल चुनाव आयोग की नज़र है.  

 

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