विधानसभा चुनाव: दिल्ली में पार्टियों की बढ़ी मुश्किलें, तेज हुई तकरार

विधानसभा चुनाव: दिल्ली में पार्टियों की बढ़ी मुश्किलें, तेज हुई तकरार

नई दिल्ली: जल्द ही दिल्ली विधानसभा चुनाव-2020 में भाजपा अकेले उतरेगी या फिर अपने पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) के साथ, इसे लेकर अब तक कोई ख़ास फैसला नहीं आया है जंहा दिल्ली के कई नेता खासकर सिख अकालियों से गठबंधन के पक्ष में नहीं कर पाया है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार यानी 15 जनवरी 2020 को इसे लेकर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ अकाली नेताओं की बैठक होने की संभावना है. पंजाब के साथ ही दिल्ली में भी दोनों पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ती रही हैं. वहीं अब तक दिल्ली विधानसभा चुनावों में शिअद बादल के हिस्से में चार सीटें आती थीं, लेकिन इस बार पार्टी छह से सात सीटों पर दावा ठोक रही है. वहीं, दूसरी ओर दिल्ली सिख प्रकोष्ठ सहित कई नेता अकाली को साथ लिए बगैर चुनाव मैदान में उतरने के पक्ष में हैं. प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में भी कुछ नेताओं ने गठबंधन का विरोध किया था. जंहा इस बात का पता चला है कि कई मुद्दों पर दिल्ली में भी भाजपा व अकाली नेताओं के बीच खुलकर मतभेद सामने आ चुके हैं. वहीं लगभग दो वर्ष पहले दिल्ली में सिख संगत के कार्यक्रम का भी अकालियों ने विरोध किया था. वहीं यह भी कहा जा रहा है कि इसके साथ ही महाराष्ट्र की पूर्व भाजपा सरकार पर गुरुद्वारा प्रबंधन में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए अकाली नेताओं ने मोर्चा खोल दिया था.

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीपीसी) अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा और भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री आरपी सिंह भी एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर चुके हैं. हरियाणा में भी दोनों पार्टियों का गठबंधन नहीं हो सका था. लेकिन बीजेपी के विरुद्ध इंडियन नेशनल लोकदल के साथ मिलकर अकाली चुनाव लड़े थे. चुनाव प्रचार में भाजपा पर तीखे प्रहार भी किए थे. इसके साथ ही नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भी अकाली नेताओं की राय भाजपा से अलग है. इन वजहों से दिल्ली में गठबंधन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

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