तू इस कदर है क्यों उदास

ू इस कदर है क्यों उदास, क्यों उतावला?
दिल-ए-ऩादान बता तो तुझे हुआ क्या है??
इरादे हो बुलन्द तो दरिया-ए-आग कुछ नहीं ।
फिर तेरे इश्क मे जमाने का धुंआ क्या है??
बड़ी खुशी से आया था जहान-ए-इश्क मे ।
पर अब तो भूल ही गया हूं खुशियां क्या हैं??
है उससे नफरत पर है वही ख्यालों मे।
अगर ये इश्क नहीं तो मुझे हुआ क्या है??
नहीं समझ सका मैं आज तक इस दुनिया को।
मगर आ जाये समझ ही तो वो दुनिया क्या है??
यहां तो कदम - कदम पर हैं बाजियां बिछी।
अगर यही है जिन्दगी तो फिर जुआ क्या है??
मैं लाख कोशिशें करके उसे भुला न सका।
वो रिश्ता तोड़ गया मुझसे तो जुड़ा क्या है??
जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचता है कवि।
तू ही बता कि इस जहां मे अनछुआ क्या है??
जवाब ढूढ़ रहा हूं मैं भी तुम भी ढूढ़ो ।
समझ नहीं आता है कि इंसां क्या है??

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