इस तरीके से पुनर्जीवित हो सकती है अर्थव्यवस्था

प्रधानमंत्री ने मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने वाले जीवन को प्राथमिकता देते हुए अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है. केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए जीडीपी के 10 फीसद की प्रभावी वित्तीय मदद की है. मंदी की लागत अधिक और दीर्घकालिक होगी. हमारे पास 40 करोड़ असंगठित कार्यबल हैं इस श्रम शक्ति को मजबूत बनाने की जरूरत है. किसानों और अन्य लोगों को पीएम किसान जैसी विभिन्न सामाजिक योजनाओं के जरिये अग्रिम भुगतान किया जा सकता है.

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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि यह गरीबों और वंचितों के लिए बिना शर्त कम से कम अगले छह महीने तक बुनियादी आय के लिए अच्छा समय है. यह मानते हुए कि सरकार अपने सभी अस्थायी मजदूरों और किसानों को अगले 3 महीनों के लिए प्रति माह 5000 रुपये का भुगतान करती है, तो इसकी लागत जीडीपी के 4 फीसद से कम होगी. यह प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण अर्थव्यवस्था में उच्च मांग और विकास को पुनर्जीवित करेगा. हालांकि, वंचितों को थोड़ी मात्रा में धन वितरित करना अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा. हमें ग्रामीण बुनियादी ढ़ाचे को मजबूत करने के लिए बड़ी और समावेशी वित्तीय खर्च की दरकार है.

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इस परिस्थिति में ऐसा ढांचा बनाकर संवर्धित किया जाना चाहिए जो उत्पादक परिसंपत्तियों और मांग को बनाने पर केंद्रित हो. लाखों नौकरियों को देने वाले एमएसएमई क्षेत्र को तत्काल और बड़ी राहत की आवश्यकता है. वे 12 करोड़ को रोजगार देते हैं और जीडीपी में 30 फीसद का योगदान करते हैं. सरकार को जीएसटी भुगतान को चालान भेजने की बजाय बिलों के संग्रह पर किए जाने का प्रावधान करना चाहिए. अकेले यह कदम से 15 फीसद अधिक और करीब 6 लाख करोड़ की तरलता प्रदान करेगा. एक अध्ययन बताता है कि सरकार और सरकारी स्वामित्व वाली संस्थाओं पर एमएसएमई का 3 लाख करोड़ रुपये बकाया है.

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