शिवपुराण में वर्णित हैं मौत के यह संकेत

धर्म और विज्ञान के बीच हमेशा से ही तथ्यों के अनुसन्धान का सिलसिला चलते आ रहा हैं. विज्ञान के द्वारा जीवन की हर क्रिया का वास्तविक रूप खोज लिया गया हैं  पर मनुष्य की मौत के बारे में अभी तक कोई खोज नहीं की जा सकी हैं.यह कोई नहीं जानता कि मृत्यु कब और किस रूप में कैसे आती है पर शिवपुराण में मौत से जुड़े कुछ संकेतों का वर्णन स्वयं भगवान शिव के द्वारा किया गया हैं. 

हिन्दू धर्म में भगवान शंकर को महांकाल के रूप में पूजा जाता हैं. उनको मृत्यु का देवता भी माना जाता हैं. महांकाल में काल का अर्थ मृत्यु भी जिसके अधीन हो इसलिए ग्रंथों में इन्हे महांकाल भी कहा गया हैं.शिवपुराण में इन संकेतों के बारे में बताया गया है.आइये जानते हैं इन संकेतों को 


जिस मनुष्य के सिर पर गिद्ध, कौवा अथवा कबूतर आकर बैठ जाए, उसकी मृत्यु एक महीने में हो जाती है.

यदि किसी व्यक्ति का शरीर अचानक  से सफेद या पीला पड़ जाए और लाल निशान दिखाई दें तो उस मनुष्य की मृत्यु 6 महीने में हो जाती है.

यदि किसी मनुष्य को चंद्रमा व सूर्य के आस-पास का चमकीला घेरा काला या लाल दिखाई दे, तो उस मनुष्य की मृत्यु 15 दिन के अंदर हो जाती है.


यदि किसी व्यक्ति को जल, तेल, घी तथा दर्पण में अपनी परछाई न दिखाई दे, तो यह 6 माह की अवश्य में उसकी मृत्यु का संकेत होता हैं .


जिस मनुष्य को छाया में सिर न दिखे या पूरी छाया नजर न आए तो ऐसा मनुष्य ज्यादा समय तक जीवित नहीं रहता.


 जिस व्यक्ति को अग्नि का प्रकाश ठीक से दिखाई न दे और चारों ओर काला अंधकार दिखाई दे तो उसका जीवन भी 6 महीने के भीतर समाप्त हो जाता है.

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