16 कलाओं में निपुण श्रीकृष्ण में थे ये गुण

भगवान श्रीकृष्ण जो कि द्वापर में भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। जिन्होंने श्रीमद्भगवत गीता के माध्यम से कर्मयोग का ज्ञान दिया। भगवान श्रीकृष्ण जिन्होंने गोपियों को प्रेम दिया और मां यशोदा नंदन के रूप में सारे जगत में प्रसिद्ध हुए। भगवान श्रीकृष्ण ने सृष्टि के हर रूप को और जीवन के हर पड़ाव को छुआ। आज भी संसार इनकी भक्ति में रमा नज़र आता है। भगवान श्रीकृष्ण धन संपदा के साथ ही मन से भी संपन्न थे। उन्होंने सुदामा को अपने यहां से खाली हाथ नहीं जाने दिया। उसके पास से चांवल लेकर उन्होंने उसे संपन्न कर मित्रता का परिचय दिया।

यूं तो भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत युद्ध में शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा की थी लेकिन उनसे बेहतर धर्नुधर कोई नहीं था। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच रूक्मणी के कारण युद्ध छिड़ गया इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अपना सुदर्शन चक्र और अर्जुन ने पाशुपतास्त्र निकाल लिया मगर देवताओं के हस्तक्षेप से दोनों ने इसे फिर से ले लिया।

हालांकि यह दोनों का शक्ति प्रदर्शन मात्र था। भगवान श्री कृष्ण में वाणी की सम्मोहकता और माधुर्यता थी। तभी दुर्वासा ऋषि जैसे ऋषी भी उनसे प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद देकर गए थे। कहा जाता है कि जब ऋषी दुर्वासा ने भगवान श्रीकृष्ण के यहां पहुंचकर भोजन किया तो उन्होंने श्रीकृष्ण से पानी मांगा ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वर्ण के एक पात्र में हाथ धोने और दूसरे पात्र में पीने के लिए पानी मंगवाया। और बड़े ही अपनत्व भाव से उन्होंने ऋषी को तृप्त किया। उनकी वाणी से ऋषी प्रभावित हुए और उन्होंने श्रीकृष्ण को आशीर्वाद दिया।  

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